
विद्यापीठ संस्थान का प्रतिष्ठित आयोजन, इतिहास के अनछुए पक्षों को उजागर करने के लिए मिला सम्मान
उदयपुर। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के पावन उपलक्ष्य पर प्रतिवर्ष दिया जाने वाला प्रतिष्ठित इतिहासकार सम्मान “प्रताप गौरव सम्मान” इस वर्ष मेवाड़ के प्रख्यात व वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. जे. के. ओझा को प्रदान किया गया है। महाराज शत्रु दमन सिंह शिवरती विद्यापीठ संस्थान के तत्त्ववधान में संस्था भवन में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह के दौरान डॉ. ओझा को इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया।
शोध और पांडुलिपि पठन के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान
शिवरती शोध संस्था के निदेशक एवं प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. अजात शत्रु सिंह शिवरती ने डॉ. ओझा के ऐतिहासिक योगदान की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने अपने गहन शोध पत्रों के माध्यम से इतिहास के कई अनछुए और महत्वपूर्ण पक्षों को दुनिया के सामने रखा है। डॉ. ओझा को प्राचीन पांडुलिपियों को पढ़ने और उनका विश्लेषण करने (पांडुलिपि पठन) में विशेष महारत हासिल है।
डॉ. जे. के. ओझा का गौरवशाली करियर : शोध पत्र और पुस्तकें: अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के इतिहास सम्मेलनों में राजस्थान विषय पर अनेक शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले डॉ. ओझा के करीब 150 शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं, पुस्तकों, इण्डियन हिस्ट्री कांग्रेस व राजस्थान हिस्ट्री कांग्रेस की प्रोसिडिंग्स में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 15 ऐतिहासिक पुस्तकों का लेखन और कई का संपादन किया है।
संगठनात्मक भूमिका: वह लगभग 10 वर्षों तक ‘राजस्थान हिस्ट्री कांग्रेस’ के जॉइंट सेक्रेट्री (संयुक्त सचिव) पद पर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का एक और ‘इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च’ (ICHR) के करीब चार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच : उन्होंने ‘सार्क फेस्टीवल ऑन सूफीज्म’ (SAARC Festival on Sufism) में भी अपना विशिष्ट शोध पत्र प्रस्तुत कर देश का मान बढ़ाया था।
अनेक राष्ट्रीय व प्रांतीय सम्मानों से हो चुके हैं अलंकृत
इतिहास के क्षेत्र में विशिष्ट और अमूल्य योगदान के कारण डॉ. ओझा को पूर्व में भी कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है:
वर्ष 1995: तेरापंथ युवक परिषद, कानोड़ द्वारा सम्मानित।
वर्ष 2001: महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन, उदयपुर द्वारा प्रतिष्ठित ‘महाराणा कुम्भा सम्मान’।
इसके अतिरिक्त उन्हें सलिला सम्मान (सलूम्बर), नागरिक अभिनन्दन (माण्डल), राजस्थान लोक कला केन्द्र (माण्डल) प्रशस्ति पत्र, डॉ. राजेन्द्र प्रकाश भटनागर स्मृति सम्मान, डॉ. गोपीनाथ शर्मा लोक जीवन सम्मान एवं प्रेमचंद सृजनपीठ (उज्जैन) अभिनन्दन आदि से अलंकृत किया जा चुका है।
सम्मान स्वरूप भेंट की गई वीर प्रताप की मूर्ति
समारोह में डॉ. जे. के. ओझा को संस्थान की परंपरा के अनुसार सम्मान स्वरूप शाल, ऊपरना, मेवाड़ी पगड़ी, प्रशस्ति पत्र, आस्का, नारियल, मोमेंटो (स्मृति चिह्न) और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य मूर्ति भेंट की गई।
उल्लेखनीय है कि इस प्रतिष्ठित सम्मान से पूर्व में मेवाड़ के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजशेखर व्यास, डॉ. देवीलाल पालीवाल, डॉ. बृजमोहन जावलिया, प्रो. के. एस. गुप्त, प्रो. गिरीषनाथ माथुर, डॉ. चंद्र शेखर शर्मा, डॉ. जी.एल. मेनारिया, डॉ. राजेंद्र नाथ पुरोहित और प्रो. मीना गौर को सम्मानित कर संस्था खुद को गौरवान्वित महसूस कर चुकी है।
About Author
You may also like
हिंदुस्तान जिंक में महिला शक्ति की डिजिटल उड़ान : 740 से अधिक महिलाएं संभाल रहीं भारत के सबसे हाई-टेक माइनिंग ऑपरेशन्स, जेंडर डाइवर्सिटी में बनाया रिकॉर्ड
मेवाड़ की प्राचीन परंपरा का निर्वहन : डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने सपरिवार किए भगवान जगन्नाथ रायजी के दर्शन, ओडिशा के डिप्टी सीएम भी रहे मौजूद
खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल ब्लास्ट की अफवाह से भारी हादसा: पटरी पर उतरे यात्रियों को दूसरी ट्रेन ने कुचला, 4 की दर्दनाक मौत
उदयपुर की सड़कों पर उतरी नारी शक्ति : यशवंत फाउंडेशन की Night Run 2.0 में दौड़ीं 300 महिलाएं, निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने दिखाई हरी झंडी
फतहसागर की पाल पर गूंजा योग संदेश : 300 से अधिक लोगों ने किया पूर्वाभ्यास, पक्षी संरक्षण के लिए बांटे घोंसले
