
यह कहानी 66 वर्षीय अवतार सिंह की है, जो अपनी उस मां की तलाश में जिंदगी के कई दशक बिता चुके थे, जिन्हें वे बचपन से कभी देख नहीं पाए थे।
बचपन का छिपा रहस्य और कनाडा का सफर
1960 के दशक में भारत के अमृतसर में पले-बढ़े अवतार (जिन्हें प्यार से ‘टीटू’ कहा जाता था) अपनी दादी के पास रहकर बड़े हुए। जब वे 8-9 साल के थे, तो उन्हें बताया गया कि उनके माता-पिता कनाडा में रहते हैं। 1968 में 9 साल की उम्र में अवतार को अकेले कनाडा भेज दिया गया। वहाँ वे अपने पिता और नई मां के साथ रहने लगे, लेकिन उन्हें हमेशा महसूस होता था कि उनके साथ एक अजनबी की तरह व्यवहार किया जा रहा है।
शादी के बाद अवतार की दादी ने उनकी पत्नी रोसी को गुप्त रूप से बताया कि अवतार अपने पिता की पहली शादी की संतान हैं। उनकी असली मां का परिवार मूल रूप से अफ्रीका से था और वे बच्चे (अवतार) को दादा-दादी के पास छोड़कर यूके या अफ्रीका चली गई थीं।
मां को ढूंढने की नाकाम कोशिशें
अपने बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट और मेडिकल हिस्ट्री के दौरान अवतार को अपनी जन्म देने वाली मां की कमी बेहद खली। अपने पिता से पूछने पर केवल इतना पता चला कि मां का नाम सविंदर था। इसके बाद अवतार ने कई वर्षों तक प्रयास किए:
गूगल और फेसबुक पर सर्च किया।
2009 में लंदन स्थित ‘नेशनल आर्काइव्स’ जाकर रिकॉर्ड खंगाले।
यूके के रेडियो स्टेशनों और टीवी शो से संपर्क की कोशिश की, लेकिन निजता के कारणों से बात नहीं बनी।
डेटा और प्राइवेसी की चिंता के कारण उन्होंने कभी डीएनए (DNA) टेस्ट नहीं कराया।
कैंसर से जंग और चैटजीपीटी (ChatGPT) का एक विचार
हाल ही में कैंसर का इलाज पूरा करने के बाद मई 2026 में अवतार अपनी पत्नी के साथ फ्रांस में छुट्टियां बिता रहे थे। 8 मई की सुबह जब उनके पास करने को कुछ नहीं था, तब उनके दिमाग में एक विचार आया— “मैंने सब कुछ आजमाकर देख लिया है, क्यों न एक बार AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को मौका देकर देखूँ?”
उन्होंने अपनी जानकारी और कुछ अनुमानों के आधार पर ChatGPT में एक विस्तृत प्रॉम्प्ट (प्रश्न) टाइप किया। उन्हें केवल इतना पता था कि उनकी मां का नाम सविंदर था, वे उनके स्वर्गीय पिता की उम्र की होंगी, सिख परंपरा के अनुसार उनका नाम ‘सविंदर कौर’ हो सकता है, और उनका परिवार अफ्रीका/यूके से जुड़ा था।
उसी AI प्रॉम्प्ट की मदद से शुरू हुई कड़ी ने अंततः अवतार को उनके यूके में रह रहे परिवार और उनकी सौतेली बहन (निक्की) से मिला दिया, जो वर्षों से डिमेंशिया से पीड़ित अपनी मां के मुंह से अपने इस बिछड़े हुए भाई (‘मेरा बच्चा’) की कहानियां सुनती आ रही थीं।
यह कहानी इस बात की खूबसूरत और दिलचस्प झलक है कि तकनीक कैसे मानवीय संवेदनाओं और बिखरे हुए रिश्तों को जोड़ सकती है।
1. एआई (AI) का इंसानी स्पर्श बनाम ‘सटीक सर्च इंजन’
इस अप्रत्याशित मिलाप पर दोनों भाई-बहन की राय बेहद दिलचस्प और अलग है:
निक्की का नज़रिया (भावनात्मक व जादुई): निक्की इस मिलाप को किस्मत और तकनीक का एक अनोखा संगम मानती हैं। उनका कहना है कि जैसे कभी-कभी सितारे एक सीध में आ जाते हैं, वैसे ही तकनीक ने भी सही समय पर काम किया। उनकी नज़र में एआई केवल कोड नहीं, बल्कि उसमें एक “इंसानी स्पर्श” भी है, जिसने दशकों पुरानी दूरियों को मिटा दिया।
अवतार का नज़रिया (तकनीकी व व्यावहारिक): पूर्व चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते अवतार एआई को लेकर अधिक व्यावहारिक हैं। उनका मानना है कि यह केवल एक ‘उन्नत खोज इंजन’ (glorified search engine) है। एआई ने बस उनके द्वारा टाइप किए गए शब्दों (कीवर्ड्स) का पैटर्न पहचाना और लाखों नतीजों में से सबसे सटीक मैच निकालकर दे दिया, इसमें कोई वास्तविक बुद्धिमत्ता या जादू नहीं था।
2. प्राइवेसी और एआई की कार्यप्रणाली पर विचार
यह कहानी तकनीक के दो अलग-अलग पहलुओं को भी उजागर करती है:
चैटजीपीटी (ChatGPT): अवतार ने जब प्रॉम्प्ट दिया, तो चैटजीपीटी ने ब्लॉग्स और पुरानी जानकारी को खंगालकर एक ऐसा लेख ढूंढा जिसने ईमेल और संपर्क का रास्ता खोला।
क्लॉड (Claude – Anthropic): जब अवतार ने कनाडा लौटने के बाद यही प्रॉम्प्ट ‘Claude’ में डाला, तो उसने किसी की निजता का उल्लंघन न करने की नीति के तहत जानकारी देने से मना कर दिया। अवतार इस सुरक्षात्मक रवैये को ही एआई का सही तरीका मानते हैं।
अंततः एक संपूर्ण परिवार
तमाम संदेहों और तकनीकी बहसों से परे, जब अवतार लंदन पहुंचे और अपनी बहन निक्की व चचेरे भाइयों से मिले, तो वह क्षण बेहद भावुक था। वही मुस्कान, वही शक्ल-सूरत—तकनीक का एक छोटा सा सहारा उस परिवार को वापस ले आया, जो समय और दूरियों के पीछे कहीं खो गया था।
About Author
You may also like
सीएम भजनलाल शर्मा का बड़ा हमला : गहलोत जादूगर हैं, कांग्रेस में हेराफेरी के लिए जाने जाते हैं, डोटासरा की बातों का जवाब दें
राष्ट्रमंडल खेल 2026 : मुफ़्लिसी और आंसुओं को हराकर जूडो में जीता गोल्ड, फटे जूतों से लेकर तिरंगे की आन तक की दो भावुक कहानियां
सुविवि और प्रकृति रिसर्च सोसायटी का संयुक्त पौधरोपण अभियान : IET व CoA परिसर में रोपे गए सैकड़ों पौधे
महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग को लेकर ऐपवा का प्रदर्शन, कलेक्ट्री पर की नारेबाजी
आंखों में अंधेरा, पर दिल में सपनों का उजाला : हक की आस में कलक्टर दफ्तर पहुंचे दृष्टिबाधित बच्चे
