एक अनूठी मिसाल: हिंदुस्तान जिंक भारत के खनन क्षेत्र (Mining Sector) में हाइड्रोजन फ्यूल पर काम शुरू करने वाली देश की पहली कंपनी बनी.
दूरदर्शी लक्ष्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए कंपनी को साल 2050 या उससे पहले ‘नेट जीरो’ (Net Zero) कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुँचाना है.
उदयपुर। भारत में स्वच्छ ऊर्जा और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी शुरुआत करते हुए वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने एडवांटेक एसोसिएट्स एलएलपी और एरो ईगल ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस रणनीतिक समझौते के तहत कंपनी अपने संपूर्ण खनन ऑपरेशन्स में ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की नई व प्रभावी संभावनाओं को तलाशेगी.
इस पहल के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीकों का मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे खनन कार्य को पूरी तरह से ‘कम कार्बन’ (Low Carbon) उत्सर्जन आधारित और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सके.
भूमिगत खनन और भारी मशीनरी में हाइड्रोजन के उपयोग पर रहेगा फोकस
खनन और भारी उद्योगों में आमतौर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में हिंदुस्तान जिंक विशेष रूप से भूमिगत खनन (Underground Mining) में हाइड्रोजन फ्यूल का इस्तेमाल करने वाली देश की अग्रणी कंपनी बनने की राह पर अग्रसर है। इस साझेदारी के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं पर काम किया जाएगा:
ग्रीन हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर : ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, कुशल स्टोरेज (भंडारण) और सुगम सप्लाई सिस्टम का विकास किया जाएगा।
तकनीकी जांच : हाइड्रोजन से चलने वाली भारी मशीनों की कार्यक्षमता को परखा जाएगा। इसके साथ ही $H2 \text{ & } ICE$ (हाइड्रोजन इंटरनल कंबशन इंजन) और फ्यूल सेल तकनीक के इस्तेमाल की व्यवहार्यता देखी जाएगी।
चरणबद्ध विकास : यह प्रोजेक्ट कई चरणों में पूरा होगा। सबसे पहले इसके तकनीकी, सुरक्षा, पर्यावरण और लागत से जुड़े पहलुओं की विस्तृत स्टडी (अध्ययन) होगी, जिसके बाद इसे भारी मशीनरी, वाहनों, जनरेटरों और अन्य उपकरणों पर बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।
“भविष्य की माइनिंग को क्लीन एनर्जी की ओर ले जाएगा यह कदम” — सीईओ अरुण मिश्रा
इस ऐतिहासिक साझेदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा: “हम सस्टेनेबल माइनिंग के लिए हमेशा से अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने पर काम कर रहे हैं। हाइड्रोजन फ्यूल के उपयोग से भारी मशीनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी और उद्योगों के लिए क्लीन एनर्जी का एक नया रास्ता खुलेगा। यह दूरदर्शी साझेदारी न केवल हमें भविष्य के लिए तैयार करेगी बल्कि देश के सतत विकास को भी गति देगी।”
पर्यावरण संरक्षण (ESG) में लगातार बना हुआ है दबदबा
यह नई पहल हिंदुस्तान जिंक की मजबूत ईएसजी (ESG) रणनीति का एक अहम हिस्सा है, जिसमें हरित ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली पर विशेष जोर दिया जाता है। कंपनी पहले से ही अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (Renewable Energy) से पूरा कर रही है।
उल्लेखनीय है कि हिंदुस्तान जिंक की इन्हीं निरंतर कोशिशों के चलते इसे लगातार तीसरे साल ‘एसएंडपी ग्लोबल असेसमेंट 2025’ में दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी का सर्वोच्च दर्जा हासिल हुआ है।
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