
उदयपुर। देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं पर ‘नेशन फर्स्ट’ के कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का मानना है कि किसी मंत्री का केवल इस्तीफा दे देना इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इस मुद्दे को लेकर ‘नेशन फर्स्ट’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर परीक्षा प्रणाली में स्थायी, तकनीक आधारित और पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोका जा सके।
नेशन फर्स्ट के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट अशोक सिंघवी ने पत्र में उल्लेख किया कि हर साल देश में करोड़ों छात्र नीट, जेईई, यूपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं में बैठते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की साख सीधे तौर पर देश की प्रतिभा चयन प्रक्रिया और युवाओं के भरोसे से जुड़ी है।
इसी क्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट विजय ओस्तवाल ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया:
“जिस प्रकार केंद्र और राज्यों के बजट निर्माण की प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय व बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत संचालित किया जाता है, ठीक उसी तर्ज पर प्रश्नपत्रों की तैयारी, छपाई, पैकिंग, भंडारण और परिवहन की संपूर्ण प्रक्रिया को भी उच्च सुरक्षा मानकों के दायरे में लाया जाए। इसमें जीपीएस ट्रैकिंग, सुरक्षित प्रिंटिंग ज़ोन, नियंत्रित प्रवेश और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली अनिवार्य की जानी चाहिए।”
पत्र में बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सीसीटीवी निगरानी और केंद्रीय कमांड सेंटर स्थापित करने की भी वकालत की गई है।
परीक्षा माफियाओं की अवैध संपत्ति ज़ब्त करने और कठोर सजा की मांग
नेशन फर्स्ट के कार्यकर्ता एडवोकेट निमेष भट्ट ने कहा कि पेपर लीक मामलों का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी या जवाबदेही तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि परीक्षा माफियाओं के पूरे नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ:
अवैध व बेनामी संपत्तियों की जब्ती की जाए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित हो।
दोषियों को भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा, सार्वजनिक पद या परीक्षा संचालन से जुड़े कार्यों के लिए स्थायी रूप से प्रतिबंधित (Blacklist) किया जाए।
“आज का छात्र—कल का सभ्य नागरिक”: आंदोलन में हिंसा और अराजकता न हो
संगठन के छात्र कार्यकर्ता लक्ष्यराज मूंदड़ा ने छात्रहित के नाम पर आंदोलन को अराजक रूप देने वाले तत्वों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए।
उन्होंने आग्रह किया कि public property (सार्वजनिक संपत्ति) को नुकसान पहुँचाने या हिंसा फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई हो, ताकि वास्तविक परीक्षार्थियों के मुद्दे से ध्यान न भटके। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि “आज का छात्र ही कल का जिम्मेदार नागरिक है”, इसलिए विरोध का तरीका लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ही होना चाहिए।
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