
कार्डिफ़ (वेल्स)। ब्रिटेन के वेल्स स्थित ऐतिहासिक कार्डिफ़ कैसल (Cardiff Castle) पर पाकिस्तान का झंडा फहराए जाने को लेकर ब्रिटिश राजनीति में तीखा विवाद छिड़ गया है। दक्षिणपंथी रिफ़ॉर्म यूके (Reform UK) पार्टी ने इसे ब्रिटिश संस्कृति पर वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश और ऐतिहासिक धरोहरों के साथ ‘शर्मनाक समर्पण’ करार दिया है। वहीं, वेल्स की कंज़र्वेटिव पार्टी की नेता नताशा असग़र और लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली कार्डिफ़ काउंसिल ने पलटवार करते हुए रिफ़ॉर्म पार्टी पर नस्लीय विवाद और नफ़रत भड़काने का सीधा आरोप लगाया है।
रिफ़ॉर्म यूके का तीखा हमला: ‘ऐतिहासिक धरोहरों पर विदेशी झंडे बर्दाश्त नहीं’
रिफ़ॉर्म यूके के आर्थिक प्रवक्ता रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ़ कैसल में आयोजित एक समारोह का वीडियो साझा करते हुए कड़ा ऐतराज जताया:
सांस्कृतिक वर्चस्व का आरोप: जेनरिक ने लिखा कि कार्डिफ़ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराया जाना ब्रिटिश संस्कृति पर हावी होने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “मैं हमारी ऐतिहासिक इमारतों पर विदेशी झंडे फहराए जाने से तंग आ चुका हूं। रिफ़ॉर्म की सरकार आने पर यह शर्मनाक समर्पण बंद होगा और हम राष्ट्रीय पहचान को पुनर्स्थापित करेंगे।”
पार्टी की आधिकारिक नीति: रिफ़ॉर्म वेल्स के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक स्थलों पर केवल वेल्स ड्रैगन या यूनियन जैक (ब्रिटिश राष्ट्रीय ध्वज) ही फहराया जाना चाहिए। इससे पहले पार्टी ने सेनेड (वेल्श संसद) के बाहर यूक्रेन का झंडा लगाए जाने का भी विरोध किया था।
कंज़र्वेटिव नेता नताशा असग़र का पलटवार: ‘यह कब्ज़ा नहीं, बहुसांस्कृतिक सम्मान है’
वेल्स संसद की कंज़र्वेटिव सदस्य नताशा असग़र ने दक्षिणपंथी बयानों की कड़ी आलोचना की:
नस्लीय ध्रुवीकरण का आरोप: नताशा ने कहा कि रिफ़ॉर्म पार्टी जनता का ध्यान अपनी नाकामियों से भटकाने के लिए नस्लीय विवादों को हवा दे रही है।
सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक: उन्होंने कहा, “मैंने भारतीय, पाकिस्तानी और पोलिश समुदायों के लिए आयोजित कई ध्वजारोहण कार्यक्रमों में भाग लिया है। ये कार्यक्रम किसी समुदाय द्वारा अधिग्रहण का नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और कार्डिफ़ की विविधता को स्वीकारने का माध्यम हैं।”
प्लैड वेस्टमिंस्टर की टिप्पणी: प्लैड वेस्टमिंस्टर की नेता लिज़ सैविल रॉबर्ट्स ने भी समर्थन करते हुए कहा कि किसी अन्य राष्ट्र के ध्वज से वेल्स की अस्मिता और पहचान को कोई ख़तरा नहीं है।
कार्डिफ़ काउंसिल की सफ़ाई: ’15 अगस्त को भारतीय तिरंगा भी फहराया गया था’
कार्डिफ़ काउंसिल के लेबर नेता क्रिस वीवर ने पूरे विवाद को ग़लत सूचना और अफ़वाहों से उपजा करार दिया:
दीर्घकालिक परंपरा: वीवर ने स्पष्ट किया कि 9 अगस्त को औपचारिक कार्यक्रम के बाद और फिर 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में यह झंडा फहराया गया था। यह काउंसिल की पुरानी परंपरा है, जिसके तहत शहर में रहने वाले विविध समुदायों के योगदान का सम्मान किया जाता है।
भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर भी फहरा तिरंगा: उन्होंने बताया कि जिस तरह 14 अगस्त को पाकिस्तानी झंडा लगाया गया, ठीक उसी तरह 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कार्डिफ़ कैसल पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी पूरी गरिमा के साथ फहराया गया था।
ब्रिटिश ध्वज भी थे मौजूद: उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दौरान कैसल की प्राचीर पर यूनाइटेड किंगडम और वेल्स के झंडे भी लगातार मौजूद थे।
पुरानी तस्वीरों से सोशल मीडिया पर माहौल गरमाने की कोशिश
विवाद के दौरान यह बात भी सामने आई कि रिफ़ॉर्म वेल्स के नेता डैन थॉमस सहित कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने वर्ष 2024 की पुरानी तस्वीरों को हालिया घटनाक्रम की तरह पेश कर जनता को भड़काने की कोशिश की थी। बहरहाल, झंडा उतारे जाने के बावजूद ब्रिटेन के राजनीतिक हलकों में बहुसंस्कृतिवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर बहस गरमाई हुई है।
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