
मातृभूमि और परिवारों की उम्मीदों के दीप बुझे, डिवाइडर लांघकर सामने से आ रहे ट्रेलर में घुसी कार के उड़े परखच्चे
उदयपुर। जो हाथ कल तक दूसरों की सांसें बचाने का हुनर सीख रहे थे, आज वही हाथ अनियंत्रित रफ्तार और हादसों की बलि चढ़ गए। शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे उदयपुर के देबारी-अंबेरी नेशनल हाईवे (प्रतापनगर थाना क्षेत्र) पर हुए एक रोंगटे खड़े कर देने वाले सड़क हादसे में पैसिफिक मेडिकल कॉलेज (उमरड़ा) के दो होनहार एमबीबीएस (MBBS) विद्यार्थियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य छात्र अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।
रामदेवजी मंदिर से महज 100 मीटर दूर घटे इस हादसे में कार की रफ्तार इतनी खौफनाक थी कि वह डिवाइडर को फांदते हुए रॉन्ग साइड जा घुसी और सामने से आ रहे भारी ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर का प्रभाव इतना भीषण था कि होंडा सिटी कार लोहे का मलबे में तब्दील हो गई और चारों छात्र उसी पिचकी हुई बॉडी में दब गए।
मार्मिक पहलू : बिलासपुर से ग्वालियर तक टूटे परिवारों के सपने
हादसे की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, उनके घरों में कोहराम मच गया। दूर-दराज के राज्यों से अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना लेकर उदयपुर भेजने वाले माता-पिता की दुनिया एक पल में उजड़ गई:
उदय बंसल : पुत्र दिलीप बंसल, निवासी मधुवन कॉलोनी, थातीपुर (ग्वालियर, मध्य प्रदेश) — मृतक
रुचिका परिहार (25) : पुत्री रघुनाथ परिहार, निवासी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) — मृतक
शशांक सिंह : पुत्र लक्ष्मीनारायण, निवासी हरियाणा — गंभीर घायल (वेंटीलेटर पर)
चौथी छात्रा : (पहचान की प्रक्रिया जारी) — गंभीर घायल (उपचाररत)
थानाधिकारी अजय सिंह राव की मौजूदगी में पुलिस टीम ने लोहे की कटर की मदद से कार की पिचकी हुई बॉडी को काटकर बेहद मशक्कत से शवों और लहूलुहान घायलों को बाहर निकाला।
सम्पादकीय दृष्टिकोण : ‘रफ्तार का जुनून’ या असमय मौतों की दावत?
उदयपुर का देबारी-अंबेरी हाईवे आए दिन तेज रफ्तार के कारण हो रहे हादसों का गवाह बन रहा है। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारे सड़क सुरक्षा तंत्र और युवाओं के भीतर पनपते ‘स्पीड थ्रिल’ पर एक बड़ा सवालिया निशान है:
सड़क सुरक्षा और गति सीमा का उल्लंघन: हाईवे पर रात और तड़के के समय वाहनों की अत्यधिक गति पर कोई प्रभावी नियंत्रण या स्पीड कैमरों की क्रियाशीलता नजर नहीं आती।
डिवाइडर की सुरक्षा संरचना पर सवाल: एक तेज रफ्तार कार का डिवाइडर लांघकर सीधे रॉन्ग साइड में पहुंच जाना यह दर्शाता है कि हाईवे के क्रैश बैरियर और डिवाइडर की ऊंचाई मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जो हादसों को रोकने के बजाय उन्हें और जानलेवा बना देते हैं।
खोती युवा सांसें : देश के भावी डॉक्टरों और युवाओं का इस तरह सड़कों पर चंद सेकेंड की लापरवाही से खत्म हो जाना न केवल उनके परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरा सदमा है।
एडिशनल एसपी उमेश ओझा के अनुसार दोनों मृतकों के शवों को मोर्चरी में रखवाकर परिजनों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है, वहीं घायलों को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम जुटी हुई है।
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