

फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत
रामगिरि, बड़गांव (उदयपुर) | विद्या भवन गांधी शिक्षा अध्ययन संस्थान में आयोजित सामाजोपयोगी उत्पादक कार्य (SUPW) शिविर का समापन ‘पूर्णतः आरोग्य और सृजन’ के संदेश के साथ संपन्न हुआ। समापन दिवस का मुख्य आकर्षण ‘आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा’ पर आधारित एक वृहद स्वास्थ्य शिविर रहा, जिसने विद्यार्थियों और क्षेत्रीय जनसमूह को ‘ऋतुचर्या’ और ‘स्वस्थ जीवनशैली’ के सूत्रों से अवगत कराया।
आयुर्वेद और पंचमहाभूत चिकित्सा पर विमर्श
मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के अनुभवी चिकित्सकों द्वारा आयोजित इस शिविर में ‘निदान एवं चिकित्सा’ सत्र का आयोजन हुआ।

चिकित्सकों ने आगंतुकों की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुरूप स्वास्थ्य परीक्षण किया। विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार आहार-विहार और घरेलू औषधियों (जैसे तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा) के माध्यम से व्याधियों का शमन किया जा सकता है। योग और प्राकृतिक चिकित्सा के सत्र में शरीर के शोधन और मानसिक शांति हेतु प्राणायाम व यौगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया गया।
कला और शिल्प में ‘हस्त-कौशल’ का प्रदर्शन

समापन समारोह के मुख्य अतिथि बड़गांव पंचायत समिति के सरपंच श्रीमान संजय शर्मा रहे। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा निर्मित ‘हस्तशिल्प’ और रचनात्मक कृतियों ने सभी का मन मोह लिया। विशेष रूप से गुजरात विद्यापीठ भ्रमण के दौरान किए गए सामाजिक एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण को चार्ट्स के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जो विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान (Practical Wisdom) को दर्शाता है।
संस्कार और संस्कृति का समन्वय

छात्राध्यापकों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों का सामंजस्य दिखा। शिविर निदेशक एवं प्राचार्य डॉ. भगवती अहीर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, “आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।” उन्होंने सभी को निरंतर ‘लोक-कल्याण’ और ‘समाजोपयोगी’ कार्यों में संलग्न रहने की प्रेरणा दी।

शिविर की सफलता पर प्रकाश डालते हुए संयोजक डॉ. प्रियंका जैन ने इसे सर्वांगीण विकास का आधार बताया, वहीं सह-संयोजक डॉ. हेमंत त्रिवेदी ने सभी का आभार (धन्यवाद) ज्ञापित किया।





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