
थूर (उदयपुर)। मेवाड़ के प्रसिद्ध ग्राम थूर में श्री सिद्धिविनायक मंदिर की मूर्ति एवं प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। संत शिरोमणि पूज्य श्री अवधेशानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस पावन प्रसंग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस अवसर पर प्रभु श्री सिद्धिविनायक और पूज्य संत से आशीर्वाद प्राप्त किया। अपने संबोधन में उन्होंने थूर ग्राम को अध्यात्म और शक्ति का केंद्र बताते हुए कहा कि यह प्राण-प्रतिष्ठा हमारी सांस्कृतिक जड़ों को और मजबूत करेगी।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने थूर की पाल को पूर्वजों की दूरदर्शिता का प्रमाण बताया।
प्रकृति पूजा : यह पाल जल-संरक्षण और प्रकृति-पूजा की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है।
झीलों का तंत्र : उन्होंने उल्लेख किया कि मेवाड़ के महाराणाओं ने हमेशा जल संरक्षण को प्राथमिकता दी और यह पाल उदयपुर की झीलों की जल प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
राजघराने का योगदान : उन्होंने महाराणा राजसिंह जी के इस क्षेत्र से विशेष संबंध और प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण में राजघराने की भूमिका को भी रेखांकित किया।
युवा भागीदारी और सांस्कृतिक उत्सव
डॉ. मेवाड़ ने आयोजन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए इसे नई सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया। महोत्सव के दौरान रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें सुप्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावणा और अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
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