महावीर जयंती पर वृद्धाश्रम में सेवा का स्पर्श, बुजुर्गों की दुआओं से भावुक हुआ माहौल


उदयपुर। महावीर जयंती के पावन (पवित्र) अवसर पर अखिल भारतीय दिगंबर जैन सकल नरसिंहपुरा संस्थान, उदयपुर द्वारा तारा संस्थान के श्रीमती कृष्णा शर्मा आनंद वृद्धाश्रम में एक भावनात्मक (दिल को छू लेने वाला) भोजन प्रसाद (भोजन वितरण) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सेवा, स्नेह और अपनत्व (अपनापन) का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया।
संस्थान के सदस्यों ने अपने हाथों से बुजुर्गों को प्रेमपूर्वक (प्यार से) भोजन परोसा। कई बुजुर्गों की आंखें नम (आँसू भरी) हो गईं, तो कहीं मुस्कान के साथ आशीर्वाद (दुआएं) बरसते नजर आए। यह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट (भावनात्मक जुड़ाव) का एहसास करा रहा था।


संस्थान के प्रमुख कुंती लाल जैन ने सभी को महावीर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सेवा केवल परंपरा (रीति) नहीं, बल्कि दिल से जुड़ी जिम्मेदारी (कर्तव्य) है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष इस दिन बुजुर्गों के साथ समय बिताकर उनके अनुभवों को सुनना और उन्हें अपनेपन का एहसास कराना ही इस आयोजन का असली उद्देश्य है।


उन्होंने तारा संस्थान द्वारा संचालित निःशुल्क (मुफ्त) नेत्र (आँख) अस्पताल और वृद्धाश्रमों की सराहना (प्रशंसा) करते हुए संस्था प्रमुख श्रीमती कल्पना गोयल एवं दीपेश मित्तल को बधाई दी और इन कार्यों को समाज के लिए प्रेरणादायक (प्रेरणा देने वाला) बताया।


तारा संस्थान के सचिव दीपेश मित्तल ने सभी सदस्यों का आभार (धन्यवाद) व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बुजुर्गों के जीवन में खुशी (आनंद) और अपनापन (निकटता) भर देते हैं। कार्यक्रम के समापन (अंत) पर संस्था प्रमुख श्रीमती कल्पना गोयल ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए जैन समाज की सेवा भावना (निस्वार्थ सेवा) की सराहना की और कहा कि यह सहयोग वर्षों से निरंतर (लगातार) चलता आ रहा है।
अंत में जब सदस्यों ने बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया, तो वह पल बेहद भावुक (दिल को छू लेने वाला) बन गया। यह आयोजन केवल भोजन सेवा नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला एक सुंदर प्रयास साबित हुआ, जिसमें करुणा (दया), सम्मान (आदर) और प्रेम (प्यार) की सच्ची झलक दिखाई दी।

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