
उदयपुर/जयपुर | यह कहानी शुरू होती है 14 मार्च 2026 की उस काली, खामोश रात से, जब उदयपुर के कुराबड़ इलाके में स्थित ‘मोहित ज्वेलर्स’ के शटर और ताले एक खौफनाक साजिश का शिकार बने। अगली सुबह जब सूरज उगा, तो दुकान मालिक अशोक सोनी के पैरों तले जमीन खिसक गई। तिजोरियां खाली थीं—20 तोला सोना और पूरे 100 किलो चांदी के जेवरात गायब थे। यह महज़ चोरी नहीं, बल्कि पुलिस की नाक के नीचे की गई एक दुस्साहसिक डकैती थी।
पहचान छिपाने का ‘अनोखा’ पैंतरा : साड़ी में छुपे शिकारी
जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो वे दंग रह गए। कैमरों में कैद हुए साये मर्दाना नहीं, बल्कि जनाना लग रहे थे। लेकिन यह कोई साधारण महिलाएं नहीं थीं। तफ्तीश में चौंकाने वाला सच सामने आया—यह शातिर कंजर गिरोह का वो खौफनाक पैंतरा था, जिसे वे ‘पहचान छिपाने’ के लिए इस्तेमाल करते थे। रात के अंधेरे में मोटरसाइकिलों पर सवार ये बदमाश महिलाओं के कपड़े पहनकर निकलते थे, ताकि पुलिस या कोई चश्मदीद उन्हें पहचान न सके। दुल्हन की पोशाक में छिपे ये ‘शैतान’ अपने साथ घातक हथियार भी रखते थे।
लेडी सिंघम का ऑपरेशन क्लीन : 7 टीमें और दिन-रात का धावा
वारदात की गूंज जयपुर तक पहुंची। उदयपुर की जिला पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. अमृता दुहन ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने तुरंत एडिशनल एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और डीएसपी गोपाल चंदेल के सुपरविजन में 7 विशेष टीमों का गठन किया। कुराबड़ थानाधिकारी तेजुसिंह के नेतृत्व में पुलिस ने साइबर सेल और जिला स्पेशल टीम (DST) की मदद से ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू किया।
तकनीकी साक्ष्यों (मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी) और पुराने अपराधियों की कुंडली खंगालने के बाद, पुलिस की सुई चित्तौड़गढ़ के बिजयपुर की ओर घूमी। टीमों ने गुप्त ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी।
पिंजरे में तीन शातिर : 30 किलो चांदी बरामद
पुलिस की मेहनत रंग लाई। सघन पूछताछ और घेराबंदी के बाद, बिजयपुर निवासी तीन शातिर बदमाशों को दबोच लिया गया— शिवा उर्फ शिवलाल कंजर, कालु लाल कंजर और महेंद्र कंजर। कड़ी पूछताछ में तीनों ने अपने 6 साथियों के साथ मिलकर मोहित ज्वेलर्स को लूटने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर चोरी की गई 30 किलो चांदी बरामद कर ली है।
अभी बाकी है पिक्चर : तीन साथी फरार
हालांकि, यह कामयाबी बड़ी है, लेकिन गिरोह के मुख्य सरगना अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं। अर्जुन, रामचंद्र और कुंदन नाम के तीन शातिर कंजर अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। बरामद चांदी महज़ 30 किलो है, जबकि चोरी 100 किलो की हुई थी। बाकी चांदी और सोना इन फरार बदमाशों के पास होने की आशंका है।
आपराधिक रिकॉर्ड: सलाखों के पीछे के ‘पुराने खिलाड़ी’
पकड़े गए आरोपियों का काला चिट्ठा भी कम खौफनाक नहीं है। महेंद्र कंजर के खिलाफ 16, कालु लाल के खिलाफ 08 और शिवा के खिलाफ 05 आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। यह गिरोह सूने मकानों और दुकानों को पलक झपकते ही साफ करने में माहिर है।
फिलहाल, शिवा, कालु और महेंद्र सलाखों के पीछे अपनी गुनाहों की सजा काट रहे हैं, और डॉ. अमृता दुहन की पुलिस उन ‘फरार दुल्हनों’ (अर्जुन, रामचंद्र, कुंदन) को ढूंढने के लिए कंजर डेरों पर नजरें गड़ाए बैठी है।
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