
उदयपुर। शहर के एक आश्रम में नाबालिग गरीब बच्ची के साथ जिस प्रकार की हैवानियत हुई है, उससे किसी की भी रूह कांप जाएगी। सिस्टम ऐसा है कि यहां किसी मामले पर कार्रवाई करने के लिए उसका हाईप्रोफाइल होना जरूरी माना जाने लगा है। शहरभर में आरोपियों को लेकर व्यापक चर्चाएं हैं, लेकिन एक गरीब बच्ची को न्याय दिलाने के लिए धरातल पर कोई मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति नजर नहीं आ रही है। आगामी चुनावों को लेकर नेता टिकट के लिए दावे और डिमांड करने में जुटे हैं, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर उनकी चुप्पी को लेकर जनता में गहरा आक्रोश है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस नेत्री डॉ. दिव्यानी कटारा संघर्ष करते दिखाई दे रही हैं, वहीं उदयपुर के प्रमुख व्हाट्सऐप ग्रुप ‘चौपाल’ के सदस्य भी लगातार सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, नागरिकों का मानना है कि केवल डिजिटल स्पेस तक सीमित रहने के बजाय अब लोगों को पुलिस, प्रशासन और नेताओं के सामने आकर यह सवाल खड़ा करना होगा।
‘चौपाल’ ग्रुप में डॉ. दिव्यानी कटारा ने लिखा कि मुख्य आरोपी के भाई को पकड़े जाने के बाद से ही आश्रम संचालिका बसंती वैष्णव की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है, लेकिन 6 दिन बीत जाने के बावजूद वह पुलिस गिरफ्त से बाहर है। सवाल यह भी है कि हर छोटी बात पर झंडे उठाकर सड़क पर आने वाले उन संगठनों के नेता और कार्यकर्ता कहां और इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद क्यों नहीं कर रहे हैं?
उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पुलिस सामान्य मामलों में आरोपियों को कहीं से भी पकड़ लाती है, तो इस मामले में इतनी बेबस क्यों नजर आ रही है? सबसे गंभीर बात यह है कि यदि आरोपी महिला फरार है, तो उसके व्हाट्सऐप आदि डिजिटल अकाउंट्स कैसे सक्रिय हैं? 6 दिन बाद भी मुख्य आरोपी महिला की गिरफ्तारी न होना बेहद दुखद है और इस पर पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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