विद्या भवन में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह—वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद, चंद्रयान-4 से लेकर स्पेस करियर तक बताईं संभावनाएं
उदयपुर। आसमान में चमकते तारों और चांद को देखकर सपने देखने वाले उदयपुर के विद्यार्थियों को बुधवार को अंतरिक्ष की दुनिया को करीब से जानने का मौका मिला। देश के प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने विद्या भवन ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और बताया कि अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिकों का क्षेत्र नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, डेटा, रिमोट सेंसिंग, संचार और स्टार्टअप सहित युवाओं के लिए अवसरों का नया संसार है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 के अवसर पर विद्या भवन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, उदयपुर सौर वेधशाला, क्षेत्रीय दूर संवेदन केंद्र, नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर और इसरो के सहयोग से आयोजित समारोह में विभिन्न स्कूलों, तकनीकी संस्थानों और शोध संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हुए। अंतरिक्ष यानों के वर्किंग मॉडल विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र रहे।
चंद्रयान-4 से मानव मिशन तक
एसएसी, इसरो अहमदाबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक इंजीनियर निशांत जायसवाल ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा, डॉ. विक्रम साराभाई के योगदान, निसार मिशन और चंद्रयान-4 सहित आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम और शुभांशु शुक्ला के मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
‘सिर्फ सपना नहीं, कौशल भी जरूरी’
आरआरएससी, इसरो जोधपुर के जनरल मैनेजर डॉ. ए.के. बेरा ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान में करियर की संभावनाओं से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में अवसर केवल वैज्ञानिकों के लिए नहीं हैं। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, डेटा, रिमोट सेंसिंग, संचार और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक संभावनाएं हैं। डिप्लोमा और आईटीआई विद्यार्थियों को भी उन्होंने स्टार्टअप और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष में जाने के लिए केवल सपना देखना पर्याप्त नहीं, अपने कौशल को उस सपने के योग्य बनाना जरूरी है।”
सूर्य और स्पेस वेदर की समझ
प्रो. नंदिता श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को सूर्य की गतिविधियों और उसके चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सौर गतिविधियों का प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, उपग्रहों और संचार प्रणालियों पर पड़ता है। विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष, सूर्य, उपग्रहों और भविष्य के अभियानों को लेकर वैज्ञानिकों से जमकर सवाल किए।
कार्यक्रम में प्रो. शिबू के. मैथ्यू, हेड, उदयपुर सौर वेधशाला सहित अनेक वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे। रमित भट्टाचार्य और डॉ. भुवन जोशी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
नजर में रहा
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस
23 अगस्त को चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता की स्मृति में मनाया जाता है।
विद्यार्थियों की जिज्ञासा
चंद्रमा, सूर्य, उपग्रह, इसरो में नौकरी और स्पेस स्टार्टअप को लेकर पूछे सवाल।
नई पीढ़ी की भागीदारी
रयान इंटरनेशनल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, विद्या भवन पॉलिटेक्निक, विद्या भवन बेसिक स्कूल और सेंट मैथियूज स्कूल के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा।
विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विक्रम सिंह कुमावत और अकादमिक कोऑर्डिनेटर चंद्रेश अरोड़ा ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। विद्या भवन सोसायटी के वित्त सचिव रेवती रमन श्रीमाली तथा व्यवस्था सचिव शैलेन्द्र बारहठ ने विद्यार्थियों को शोध और अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन दर्शना शर्मा, डॉ. सोनू हीरावत और नितिन सनाढ्य ने किया।
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