
जयपुर। महाकुंभ के अवसर पर संगम के पवित्र जल में स्नान करने के बाद प्रयागराज स्थित राजस्थान मंडपम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में देवस्थान विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जो न केवल धार्मिक स्थलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पुजारियों की स्थिति को भी मजबूत करेंगे।
बैठक में एक बेहद अहम निर्णय लिया गया, जिसमें देवस्थान विभाग के 390 प्रत्यक्ष प्रभार मंदिरों और 203 आत्मनिर्भर मंदिरों में सेवा पूजा, भोग, प्रसाद, उत्सव, पोशाक, जल, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए भोगराग की राशि को दोगुना कर दिया गया है। अब, हर मंदिर को 3 हजार रुपए प्रति माह मिलेंगे, जो पहले से कहीं अधिक होगा।
इसके साथ ही, अंशकालीन पुजारियों के मानदेय में भी इजाफा किया गया है। पहले जहां वे 5 हजार रुपए प्रतिमाह प्राप्त कर रहे थे, अब उन्हें 7500 रुपए प्रति माह मिलेगा। यह निर्णय उनकी मेहनत और समर्पण को और भी सम्मानित करता है।
साथ ही, राज्य के भीतर और बाहर स्थित देवस्थान विभाग के मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 101 करोड़ रुपए का फंड मंजूर किया गया है। इस राशि से 6 राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार मंदिरों और 26 आत्मनिर्भर मंदिरों की मरम्मत और विकास कार्य होंगे। इसके अलावा, राज्य के बाहर स्थित मंदिरों का सर्वेक्षण करवाया जाएगा और जीर्ण-शीर्ण मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 25 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है।
इन फैसलों से न केवल राजस्थान के धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा, बल्कि पुजारियों की जिंदगी भी बेहतर होगी। यह कदम न केवल धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए हैं, बल्कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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