
उदयपुर। राजस्थान में आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा संगठन ने राजपरिवारों से अपने रिश्ते और गहरे करने की रणनीति तेज़ कर दी है। इसी कड़ी में बुधवार को तेलंगाना भाजपा के संगठन मंत्री एवं राजस्थान भाजपा के पूर्व संगठन प्रमुख चंद्रशेखर ने मेवाड़ राजवंश के युवा उत्तराधिकारी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से सिटी पैलेस में शिष्टाचार भेंट की। हालांकि यह मुलाकात औपचारिक बताई जा रही है, लेकिन इसके राजनीतिक अर्थ तलाशे जा रहे हैं।
बैठक में देश और प्रदेश के समसामयिक राजनीतिक हालात, सनातन संस्कृति की रक्षा, और मेवाड़ की ऐतिहासिक विरासत को लेकर बातचीत हुई। लेकिन जानकारों का मानना है कि भाजपा इस तरह की मुलाकातों के जरिए राजपूत समुदाय, खासतौर पर मेवाड़ क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ज़मीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
विशेष बात यह रही कि इस मुलाकात में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, शहर अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, और पूर्व जिलाध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली जैसे संगठन के प्रमुख नेता भी मौजूद रहे — जो यह संकेत देता है कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि एक रणनीतिक बैठक थी।
भाजपा पिछले कुछ वर्षों से राजस्थान में पारंपरिक राजघरानों और प्रभावशाली सामाजिक समूहों के साथ समीकरण साधने में लगी है। पूर्व में भी डूंगरपुर, जयपुर और बीकानेर राजपरिवारों से भाजपा नेताओं की ऐसी ही मुलाक़ातें सुर्खियों में रही हैं।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह, जो ना केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता और संस्कृति संरक्षक के रूप में पहचान रखते हैं, बल्कि युवाओं के बीच एक प्रभावशाली चेहरा भी बन चुके हैं — उन्हें राजनीतिक मंच पर सक्रिय करने की संभावनाएं भी इससे बल पा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा यदि डॉ. लक्ष्यराज को सांस्कृतिक या राजनीतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ती है, तो यह मेवाड़ और उससे जुड़े क्षत्रिय समाज में भाजपा की पकड़ को और मज़बूत कर सकता है।
बहरहाल, संगठन मंत्री चंद्रशेखर की यह मुलाकात केवल ‘शिष्टाचार’ के दायरे में नहीं देखी जा रही है। इसके पीछे भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति छिपी हो सकती है — जिसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, धर्म-संस्कृति का संरक्षण, और सामाजिक नेतृत्व को राजनीतिक प्लेटफॉर्म पर लाने की सोच प्रमुख है।
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