
उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुंदा इलाके में दो चचेरी बहनों के शव घर से सिर्फ 500 मीटर दूर एक पहाड़ी के पास मिले। दोनों बहनें 16 और 17 साल की थीं, और वे 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थीं। उनके शव सोमवार सुबह 7 बजे पाए गए, जिससे परिवार और इलाके में शोक और घबराहट की लहर दौड़ गई।
दोनों बहनें रविवार शाम को घर से खेत पर जाने के लिए निकली थीं, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटने पर उनके परिजनों ने उन्हें ढूंढना शुरू किया। सुबह 7 बजे के करीब, जब परिजन घर से 500 मीटर दूर एक पहाड़ी के पास पहुंचे, तो दोनों लड़कियों का शव पाया गया। दोनों बहनें एक जैसी ड्रेस पहने हुए थीं, जो यह दिखाता है कि वे एक साथ घर से निकली थीं।
परिजनों का कहना है कि पिछले दो महीनों से दोनों बहनें मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान थीं। परिवार ने कई बार उनसे इस बारे में पूछा, लेकिन लड़कियों ने कभी कोई खुलासा नहीं किया। बाद में यह जानकारी सामने आई कि कोई शख्स उन्हें परेशान कर रहा था। अब परिवार को शक है कि इसी शख्स ने जहर देकर दोनों को मार डाला है।
पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। एएसआई नंदलाल के मुताबिक, प्रारंभिक जांच और घटनास्थल की स्थिति से यह पता चला है कि दोनों बहनों की मौत जहर खाने से हुई है। पुलिस ने परिजनों से जानकारी लेकर कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने की योजना बनाई है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों लड़कियाँ एक ही स्कूल में पढ़ती थीं और रोज़ साथ-साथ स्कूल जाती थीं। वे हमेशा एक-दूसरे के साथ रहती थीं, और रविवार को भी एक जैसी ड्रेस पहन कर घर से निकली थीं। यह कोई सामान्य घटना नहीं है, और इस तरह के मामलों में जल्दी से समाधान की आवश्यकता है ताकि अपराधी को सजा मिल सके।
पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। वे कॉल डिटेल्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर आरोपियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और अपराधी को पकड़ने की पूरी कोशिश की जाएगी।
यह घटना न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक बड़ा सदमा है। दो युवा लड़कियों की मौत ने सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और अपराध पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार की मांग है कि इस मामले में शीघ्र और कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि अपराधी को सजा मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाएँ रोकी जा सकें।
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