फोटो साभार : कमल कुमावत

उदयपुर। उदयपुर नगर परिषद के दो बार उपसभापति रहे वीरेंद्र बापना का अचानक निधन, शहर के लिए एक अपूरणीय क्षति है। डेंगू के चलते वे कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे, और उनकी तीन बेटियों के लिए उनका न होना एक बहुत बड़ा दुख है। उनकी अंतिम यात्रा शाम 4 बजे निवास स्थान हजारेश्वर कॉलोनी से अशोक नगर मोक्षधाम जाएगी।
वीरेंद्र बापना ने अपने जीवन में सिद्धांतों की रक्षा की और राजनीति में कभी कोई समझौता नहीं किया। उनके दो टर्म के दौरान, उन्होंने नगर परिषद के कर्मचारियों, अधिकारियों और साथी पार्षदों के साथ मिलकर काम किया और सभी के साथ अच्छे संबंध बनाए। उनकी सहृदयता और व्यवहारिक दृष्टिकोण के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।
दशकों से वे अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और आम लोगों के काम के लिए खड़े रहे। जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने लोगों की मदद करने में कभी संकोच नहीं किया। हाल ही में चल रहे दीपावली मेले के समय, उनके योगदान की यादें लोगों के दिलों में ताजा थीं। इस मेले की शुरुआत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जब सभापति युधिष्ठिर कुमावत, तत्कालीन निर्माण समिति अध्यक्ष रवींद्र श्रीमाली और गैराज समिति अध्यक्ष अनिल सिंघल के साथ मिलकर काम किया।
तत्कालीन पार्षद दिनेश गुप्ता ने उनकी सहृदयता की सराहना करते हुए कहा कि “बापना जी बहुत ही सहृदय और व्यवहारिक व्यक्तित्व के धनी थे।” उनके निधन से उदयपुर ने एक ऐसे नेता को खो दिया है जो हमेशा लोगों की भलाई के लिए खड़ा रहा। उनका योगदान और उनके प्रति लोगों की प्रेम भरी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
वीरेंद्र बापना का योगदान हमारे लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा, और उनका नाम हमेशा एक दयालु और मददगार नेता के रूप में याद किया जाएगा। उनके जीवन और कार्यों की यह धरोहर हमें अपने भीतर से एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती है।
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