
उदयपुर। उदयपुर की सड़कों पर पिछले कुछ वर्षों से छाई दहशत का नाम रहा है — टाइगर बाबा-425 गैंग। इस गैंग ने अपने आपराधिक कृत्यों से न केवल पुलिस के लिए चुनौती खड़ी की, बल्कि आम लोगों के दिलों में भय का साया भी गहरा दिया। मगर आखिरकार पुलिस ने इस गैंग के मुख्य सरगना और हिस्ट्रीशीटर नितेश उर्फ कूका को गिरफ़्तार कर एक बड़ा सफलता हासिल की है।
शुरुआत : एक युवा की गिरफ़्तारी जिसने पूरे गैंग का नेटवर्क खोला
गोवर्धन विलास थाना पुलिस ने शनिवार को नितेश (20) को गिरफ्तार किया, जो खेरवाड़ा थाना क्षेत्र का जाना माना हिस्ट्रीशीटर है। नितेश ने पूछताछ में चार अलग-अलग जगहों पर लूट की वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की। इसके साथ ही पुलिस ने एक लूटी गई बाइक भी बरामद की है, जिससे घटना की सच्चाई पर और बल मिलता है।
थानाधिकारी दिलीप सिंह झाला ने बताया कि नितेश के खिलाफ चोरी, लूट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के कुल नौ मामले पहले से दर्ज हैं।
गैंग की पृष्ठभूमि : चार दोस्तों का बना अपराध का नेटवर्क
करीब चार साल पहले उदयपुर के चार युवकों — प्रवीण सिंह उर्फ टाइगर, आर्यन, जीवन उर्फ जेडी और दिनेश कुमार ने मिलकर इस गैंग का गठन किया। नाम रखा गया टाइगर बाबा-425।
सोशल मीडिया के दौर में इस गैंग ने खुद को नया आयाम दिया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर इनके कई फेक अकाउंट्स बने, जहां वे अपनी आपराधिक गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करते थे।
यह सब देखकर कई युवा इनके कायल हो गए और गैंग में जुड़ने लगे। ये गैंगस्टर केवल अपराधी ही नहीं, बल्कि एक तरह से डिजिटल दुनिया के ‘स्टार’ बन गए थे।
हाईवे की सुनसान राहें, जहां होती थी लूटपाट
गैंग के सदस्य सुनसान इलाकों और हाईवे के वीरान रास्तों पर निशाना बनाते थे। कूका ने पुलिस को बताया कि वे अक्सर हथियार के बल पर राहगीरों को रोककर उनसे नकदी, मोबाइल, ज्वेलरी और वाहन लूट लेते थे।
यह गैंग अपनी हर वारदात के बाद सोशल मीडिया पर अपनी ‘विजय’ का जश्न मनाता था, जो नशे, मस्ती और भड़कीले कपड़ों से भरा होता था।
पुलिस की घेराबंदी : 50 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच
हाईवे पर बढ़ती अपराधी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने लगभग 50 सीसीटीवी कैमरों का विश्लेषण किया। इसी के जरिए ललीत उर्फ ललिया नाम के संदिग्ध का पता चला, जिसे अप्रैल में गिरफ्तार कर गैंग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
विशेष बात यह रही कि नितेश अपने मोबाइल का उपयोग नहीं करता था। वह केवल अपने साथियों के फोन से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में रहता था, जिससे पुलिस के लिए ट्रैकिंग बेहद कठिन थी।
पुलिस ने गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी है। फरार अजीत खराड़ी की पकड़ पर विशेष नजर है। वहीं, सोशल मीडिया पर फैले इनके फर्जी अकाउंट्स को बंद करने के प्रयास भी जारी हैं।
थानाधिकारी झाला का कहना है कि यह गिरफ्तारी केवल एक अपराधी का पर्दाफाश नहीं, बल्कि डिजिटल युग में बढ़ रहे अपराधों से निपटने की शुरुआत है।
सामाजिक चेतावनी
यह केस सिर्फ एक अपराध कहानी नहीं है, बल्कि उन खतरों की चेतावनी भी है जो सोशल मीडिया की चमक-धमक के पीछे छिपे होते हैं। ग्लैमर के पीछे छिपा हुआ अंधेरा अक्सर युवा पीढ़ी को गलत रास्ते पर ले जाता है।
“टाइगर बाबा-425” गैंग की कहानी हमें याद दिलाती है कि अपराध केवल सड़कों पर नहीं होता, बल्कि कई बार वह हमारे मोबाइल स्क्रीन पर भी पलता है।
उदयपुर के हाईवे से आई यह कहानी बताती है कि अपराध और सोशल मीडिया का गठजोड़ कितना खतरनाक हो सकता है।
आइए, हम सब मिलकर इस खतरे को पहचानें और युवा पीढ़ी को सही राह दिखाने की कोशिश करें।
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