
उदयपुर। सर्द रात, चारों ओर खामोशी और एक मासूम जिंदगी मौत से जूझ रही थी। महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में 10 दिन के बच्चे को तुरंत 🅾️➖ रक्त की आवश्यकता थी। परिजन परेशान थे, ब्लड बैंक में खून उपलब्ध नहीं था। हर दरवाजा खटखटाने के बाद उन्होंने रक्तदाता युवा वाहिनी से संपर्क किया।
इस आपात स्थिति में, इंसानियत का दीप जलाते हुए गर्वित पालीवाल ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया। आधी रात को ठंड की परवाह किए बिना वे ब्लड बैंक पहुंचे और मासूम के लिए रक्तदान किया। यह पहली बार नहीं था जब गर्वित ने ऐसा साहसिक कदम उठाया हो। पिछले महीने भी, 23 दिसंबर 2023 को, उन्होंने आधी रात में एक 8 दिन के नवजात के लिए रक्तदान कर उसकी जिंदगी बचाई थी।
गर्वित पालीवाल का कहना है, “जब भी किसी की जिंदगी बचाने का मौका मिलता है, वह मेरे लिए सौभाग्य की बात होती है। दिन में अन्य साथी सेवा दे सकते हैं, लेकिन रात की जरूरत पर मुझे बुलाना मेरे लिए सम्मान की बात है।”
रक्त युवा वाहिनी के रोहित जोशी बताते हैं कि इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत अभी भी जिंदा है। जब रिश्तेदार और परिवार कदम पीछे खींच लेते हैं, तब ऐसे निस्वार्थ नायक न केवल एक जीवन बचाते हैं, बल्कि समाज को प्रेरणा भी देते हैं।
रक्तदान महादान है।
यह केवल एक सेवा नहीं, बल्कि एक जिंदगी बचाने का कार्य है। गर्वित जैसे नायक समाज के लिए मिसाल हैं, जो हमें सिखाते हैं कि मदद करने का जज्बा किसी भी समय, किसी भी परिस्थिति में जीवित रहना चाहिए।
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