
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में दुर्गाष्टमी के पावन अवसर पर करुणामयी मां महागौरी सहित मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना की गई। इस अवसर पर संस्थान के लियों का गुड़ा स्थित सेवा महातीर्थ परिसर में कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें 101 दिव्यांग कन्याओं का पूजन कर उनके सुखद उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की गईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बड़गांव उपखण्ड की एसडीएम लतिका पालीवाल, संस्थान संस्थापक कैलाश ‘मानव’, विशिष्ट अतिथि विजयलक्ष्मी पालीवाल और निदेशक वंदना अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कन्याओं का पूजन किया। इससे पहले मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की भव्य आरती उतारी गई। इसके बाद कन्याओं को उपहार प्रदान किए गए और उन्हें हलवा, पूरी, खीर और चने का प्रसाद खिलाया गया। इन सभी कन्याओं को संस्थान में नवरात्रि के दौरान नि:शुल्क दिव्यांगता सुधारात्मक सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।

मुख्य अतिथि लतिका पालीवाल ने कहा “नवरात्र केवल उपवास और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, परोपकार और प्रकृति से जुड़ने का सशक्त अवसर है। दिव्यांगजनों के जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान लाने का जो कार्य नारायण सेवा संस्थान कर रहा है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्पद है।”
प्रारंभ में संस्थापक कैलाश ‘मानव’ और निदेशक वंदना अग्रवाल ने अतिथियों का पगड़ी,शाल, उपरणा और प्रतीक-चिह्न भेंट कर स्वागत किया। पूजन के दौरान कन्याओं के चेहरों पर खुशी झलक रही थी।

निदेशक वंदना अग्रवाल ने बताया गया कि संस्थान विगत 21 साल से कन्या पूजन करता आ रहा है। दिव्यांग कन्याओं को नियमित चिकित्सा, शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे अपने जीवन को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा सकें। समारोह में जनसंपर्क प्रमुख भगवान प्रसाद गौड़, विष्णु शर्मा हितैषी, कुलदीप सिंह शेखावत व महिम जैन मौजूद रहे।
About Author
You may also like
जब श्रद्धांजलि शब्दों से आगे बढ़कर बनेगी किसी की जिंदगी… प्रो. विजय श्रीमाली की पुण्यतिथि पर होगा महा रक्तदान शिविर
उदयपुर: एसीबी का बड़ा धमाका, संयुक्त निदेशक के लिए 30,000 रुपये की घूस लेते दलाल गिरफ्तार, अधिकारी मौके से फरार
पर्दे के पीछे : उदयपुर के चौराहे पर ‘वक़्त’ का नया सेल्यूलॉयड और शिल्पियों का मुग़ल-ए-आज़म
आधी आबादी की सुरक्षा का नया सवेरा : उदयपुर पुलिस की अनूठी पहल ‘महिला सुरक्षा संकल्प अभियान’, रंगमंच पर हुआ शक्ति का सम्मान
विरासत बनाम तुगलकी फरमान : क्या पाबंदियों के बोझ तले दम तोड़ देगा उदयपुर का ऐतिहासिक गुलाबबाग?
