
गोगुंदा (उदयपुर)। जब एक बेटी घर से स्कूल या कॉलेज के लिए निकलती है, तो उसके कदमों के साथ पूरे परिवार की उम्मीदें चलती हैं। अगर कोई उन कदमों को रोकने की कोशिश करेगा, तो उसे पुलिस की सख्ती का सामना करना ही होगा।” यह शब्द किसी फिल्म के डायलॉग नहीं, बल्कि उदयपुर की कप्तान (एसपी) डॉ. अमृता दुहन के हैं, जो गोगुंदा में जनता के बीच एक पुलिस अफसर बनकर नहीं, बल्कि एक अभिभावक और रक्षक बनकर पहुंचीं।
आपका एक वॉट्सएप संदेश, मेरा हथियार बनेगा
एसपी ने संवाद के दौरान अपनी उस संवेदनशीलता को साझा किया, जो अक्सर खाकी के पीछे छिपी रहती है। उन्होंने अपना व्यक्तिगत सीयूजी नंबर (8764527201) साझा करते हुए कहा, “हो सकता है आप फोन करने से कतराएं, या कॉल मेरे गनमैन उठाएं, लेकिन इस नंबर पर किया गया आपका हर वॉट्सएप सीधे मेरे मोबाइल में आता है। उसे मैं खुद पढ़ती हूँ। आप बस सूचना दीजिए, आपकी पहचान को गुप्त रखना और आपकी बेटी को सुरक्षा देना मेरी जिम्मेदारी है।”
अवैध दौलत और शोर मचाती बाइक पर गहरी चोट
डॉ. दुहन ने समाज के उस पहलू पर भी गहरी चिंता जताई जहाँ युवा भटक रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपके आस-पास कोई ऐसा है जो कुछ काम नहीं करता, फिर भी उसके पास बेतहाशा पैसा आ रहा है, तो समझ लीजिए कि वह समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है। ऐसे ‘शॉर्टकट’ से अमीर बनने वालों की जानकारी मुझे दें।” उन्होंने उन मनचलों को भी चेतावनी दी जो तेज रफ्तार बाइक से दहशत फैलाते हैं, “सड़कें लोगों के चलने के लिए हैं, हुड़दंग के लिए नहीं।”
पीड़ितों के आंसू पोंछे और दिलाया भरोसा
अपनी यात्रा के दौरान एसपी का मानवीय चेहरा तब और निखर कर आया जब वे चर्चित ‘तुलसीराम प्रकरण’ के पीड़ित परिवार और चाकूबाजी का शिकार हुए शंकरलाल पालीवाल के परिजनों से मिलीं। उन्होंने सिर्फ कागजी कार्रवाई की बात नहीं की, बल्कि उनके बीच बैठकर उनकी पीड़ा सुनी और हाथ थामकर भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में पुलिस उनके साथ खड़ी है।
गोगुंदा के इस दौरे ने जनता को यह अहसास कराया कि पुलिस का काम सिर्फ डंडा चलाना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और पारदर्शी समाज की नींव रखना भी है।
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