
उदयपुर। नवरात्रि के शुभ अवसर पर माता रानी के प्रति श्रद्धा का ऐसा अनुपम दृश्य शायद ही कहीं और देखने को मिले। उदयपुर के सुथारवाड़ा मित्र मंडल द्वारा सजाया गया माता का तीन मंजिला दरबार लोगों के लिए अद्वितीय भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक बन गया है। यह परंपरा बीस सालों से अनवरत चल रही है, और हर साल इसका आयोजन और भव्यता बढ़ती ही जा रही है।
इस दरबार की खासियत सिर्फ इसकी विशालता में नहीं, बल्कि इसके सजने की तैयारी में छिपी है। विशेष कारीगरों द्वारा तैयार किया गया यह दरबार महीनों की मेहनत का परिणाम होता है। बाहर से लाई गई माता की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही पूरे इलाके में उत्सव का माहौल बन जाता है। बंदूकों की सलामी से शुरू होने वाला यह समारोह, मानो भक्तों के दिलों में सजीव माता की उपस्थिति का एहसास करा देता है। मित्र मंडल के प्रमुख तुलसीराम माली इस आयोजन की रीढ़ माने जाते हैं। छोगालाल भोई और भामस के सत्यनारायण जी जैसे श्रद्धालु भी हर साल इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाते हैं।
श्रद्धा और सौहार्द्र का अनूठा संगम
यहां आने वाले भक्तों की भीड़ सिर्फ उदयपुर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों से भी लोग यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि हर नागरिक नवरात्रि के दौरान कम से कम एक बार सुथारवाड़ा स्थित माता के दरबार में हाज़िरी लगाता है। राजनेताओं से लेकर अधिकारियों तक, हर वर्ग का यहां आना इस आयोजन की लोकप्रियता और महत्व को दर्शाता है।
धर्म की सीमाओं को पार करते हुए, कई बार मुस्लिम युवक भी इस दरबार को सजाने में अपना योगदान देते हैं। आज के नफरत भरे माहौल में यह आयोजन साम्प्रदायिक सौहार्द्र का एक आदर्श उदाहरण है, जो बताता है कि श्रद्धा और आस्था किसी एक धर्म तक सीमित नहीं होती। यह आयोजन हर वर्ष नवरात्रि को सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का उत्सव भी बना देता है।
आस्था की ऐसी अलौकिकता
हर साल नवरात्रि के ये नौ दिन जैसे पूरा सुथारवाड़ा माता के चरणों में समर्पित हो जाता है। माता के दरबार में हर भक्त अपनी मिन्नत लेकर आता है, और माता के सामने अपनी श्रद्धा ऐसे प्रकट करता है मानो साक्षात माता उनके सामने हों। यह मंजर इतना अद्भुत होता है कि वहां पहुंचे हर व्यक्ति के मन में यह भाव जागता है कि उनके जीवन की सारी कठिनाइयां माता के आशीर्वाद से दूर हो जाएंगी।
उदयपुर का यह नौ दिवसीय आयोजन न केवल शहर की धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि समाज में सौहार्द्र और एकता की भावना को भी प्रकट करता है। सुथारवाड़ा मित्र मंडल का यह आयोजन, भक्ति और सौहार्द्र का ऐसा संगम है, जिसे देखकर हर कोई दाद दिए बिना नहीं रह सकता।
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