
अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) अजमेर ने 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए अंकतालिकाओं और प्रमाण-पत्रों में संशोधन के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। बोर्ड द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, अब छात्र अपने नाम, उपनाम, माता-पिता के नाम या जन्मतिथि में त्रुटि सुधार परीक्षा परिणाम घोषित होने के केवल एक साल के भीतर ही करा सकेंगे। इस तय समय सीमा (एक वर्ष) के बीत जाने के बाद संशोधन के लिए आने वाले किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। बोर्ड ने इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
नए नियमों के लागू होने के साथ ही बोर्ड ने विलंब शुल्क (लेट फीस) देकर सालों बाद दस्तावेजों में सुधार कराने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अनुसार, अब किसी भी प्रकार का संशोधन केवल स्कूल के मूल स्कॉलर रजिस्टर (SR), प्रवेश आवेदन पत्र (एडमिशन फॉर्म) और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) के आधार पर ही किया जाएगा। विशेषकर जन्मतिथि में सुधार के लिए इन तीनों ही दस्तावेजों का होना अनिवार्य होगा।
आवेदन शुल्क : अंकतालिका या प्रमाण-पत्र में होने वाली प्रत्येक गलती के सुधार के लिए 300 रुपए प्रति परीक्षा का शुल्क निर्धारित किया गया है।
घोषणा-पत्र : आवेदक छात्र और अभिभावक को भविष्य में इस संशोधन के संबंध में बोर्ड के सामने कोई नया दावा पेश न करने का एक शपथ/घोषणा-पत्र देना होगा।
मार्कशीट पर डिस्क्लेमर : यदि माता या पिता के नाम में कोई बदलाव किया जाता है, तो मार्कशीट पर ‘Change in Candidate’s Mother’s/Father’s name from… to…’ का स्पष्ट उल्लेख और बोर्ड का डिस्क्लेमर अंकित किया जाएगा।
पूरा नाम बदलने की शर्त : नाम में आंशिक सुधार के बजाय यदि नाम पूरी तरह बदलने का मामला है, तो छात्र को न्यायालय (कोर्ट) का आदेश और परीक्षा परिणाम जारी होने से पहले सरकारी राजपत्र (गवर्नमेंट गजट) में प्रकाशित अधिसूचना प्रस्तुत करनी होगी।
समिति ने लिया नीतिगत निर्णय : गौरतलब है कि वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर में अध्यक्ष और प्रबंध मंडल का पद रिक्त चल रहा है। सामान्यतः ऐसे बड़े नीतिगत फैसले प्रबंध मंडल स्तर पर ही लिए जाते हैं, लेकिन मामले की गंभीरता और आवश्यकता को देखते हुए बोर्ड सचिव द्वारा गठित एक विशेष समिति ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर आदेश जारी किया है।
शिक्षक संघ ‘रेसटा’ के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बोर्ड के इस फैसले की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों और अभिभावकों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा है कि परिणाम जारी होते ही सभी छात्र अपनी अंकतालिका और प्रमाण-पत्र की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि कोई भी त्रुटि हो, तो समय रहते एक साल के भीतर ही स्कूल के माध्यम से आवेदन कर दें, क्योंकि समय सीमा समाप्त होने के बाद यह अवसर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
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