
उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों “बर्थडे पॉलिटिक्स” नया चर्चा का विषय बनती जा रही है। पार्टी के भीतर नेताओं के जन्मदिन अब सिर्फ शुभकामनाओं का अवसर नहीं रहे, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और सियासी संकेतों के मंच के रूप में देखे जा रहे हैं।
हाल ही में पंजाब के राज्यपाल और मेवाड़ के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया का जन्मदिन उनके समर्थकों ने बड़े स्तर पर मनाया था। उसके तुरंत बाद भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह और अब पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व यूआईटी चेयरमैन रविंद्र श्रीमाली का जन्मदिन भी पूरे उत्साह और संगठनात्मक ताकत के साथ मनाया गया।
रविवार को आयोजित श्रीमाली के जन्मदिवस कार्यक्रम में महामहिम कटारिया, विधायक ताराचंद जैन और विधायक फूल सिंह मीणा सहित कई वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने श्रीमाली को उपरणा ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके संगठन व विकास कार्यों की प्रशंसा की।
कटारिया ने भी इस अवसर पर कहा कि “रवींद्र श्रीमाली ने भाजपा संगठन में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है और शहर के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।”
हालांकि, संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि लगातार हो रहे इन जन्मदिन आयोजनों ने भाजपा में “आंतरिक छवि निर्माण की राजनीति” को हवा दी है। कुछ इसे संगठनात्मक मजबूती का प्रदर्शन मानते हैं तो कुछ इसे राजनीतिक महत्वाकांक्षा का संकेत।
विश्लेषकों का कहना है कि इन आयोजनों में शक्ति प्रदर्शन से यह संदेश भी जाता है कि भाजपा में स्थानीय स्तर पर नेता अपनी सक्रियता और समर्थन आधार दिखाने की कोशिश में हैं — खासकर तब जब पार्टी में आगामी संगठनात्मक बदलावों की चर्चाएं तेज हैं।
फिर भी, यह मानना गलत नहीं होगा कि रविंद्र श्रीमाली जैसे नेताओं की संगठनात्मक निष्ठा, प्रबंधन क्षमता और विकास दृष्टि ने उन्हें उदयपुर की राजनीति में एक स्थायी स्थान दिलाया है। जन्मदिन का अवसर चाहे राजनीतिक रंग लिए हो, पर श्रीमाली के कार्य और उनकी सक्रियता अब भी भाजपा में एक संतुलित और प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
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