उदयपुर नगर निगम वार्ड-6 : पूर्व पार्षद व पूर्व मेयर के मजबूत साथ से दलपत सोनी की जन-आंदोलन बनी चुनावी मुहिम, अजीत चौधरी से कड़ा मुकाबला

उदयपुर। उदयपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 6 में इस बार चुनावी सरगर्मी सिर्फ ईवीएम और सत्ता के फेरबदल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक राजनीति के खिलाफ आम नागरिक की जवाबदेही का बड़ा इम्तिहान बन चुकी है। सादगी पसंद, विनम्र और आम जन से सीधे जुड़े दलपत सोनी ने जब से चुनावी मैदान में ताल ठोकी है, वार्ड के गली-मोहल्लों की राजनीतिक फिजा में हलचल पैदा हो गई है। उनकी यह मुहिम बंद कमरों में तय होने वाले सियासी समझौतों को दरकिनार कर जनता की सीधी भागीदारी और वार्ड के अंतिम व्यक्ति के हक की लड़ाई बन गई है।

सर्वसमाज में मजबूत पकड़ बनी दलपत की ताकत

दलपत सोनी के इस आंदोलननुमा अभियान को उस वक्त जबर्दस्त मजबूती मिली, जब वार्ड से चुने गए पूर्व मेयर चंदर सिंह कोठारी व पूर्व पार्षद दिनेश गुप्ता खुलकर उनके समर्थन में आ गए। वार्ड के हर वर्ग, हर तबके में गहरी पैठ और बेदाग छवि रखने वाले गुप्ता व कोठारी पूरी निष्ठा से दलपत सोनी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं। दिनेश गुप्ता का वार्डवासियों से पुराना आत्मीय नाता और दलपत सोनी की बेबाक, जनहितैषी राजनीति—दोनों का यह मेल जमीन पर एक मजबूत सामाजिक गठबंधन खड़ा कर चुका है। दोनों नेता हर गली में जाकर लोगों से संवाद साध रहे हैं और कह रहे हैं कि वार्ड की समस्याओं का समाधान किसी बड़े नेता की मेहरबानी पर नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक ताकत पर निर्भर करता है।

निवर्तमान पार्षद से नाराजगी, बदलाव की उठी पुरजोर मांग

वार्ड में घूमते ही स्थानीय नागरिकों का पुराना दर्द भी छलक रहा है। पूर्व में कांग्रेस से पार्षद चुने गए अरुण टांक के कार्यकाल को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरा असंतोष और नाराजगी साफ महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद बुनियादी सुविधाओं—टूटी सड़कों, नालियों की नियमित सफाई, स्ट्रीट लाइट्स और पेयजल की किल्लत—की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इसी उपेक्षा ने आम मतदाताओं को नए, जवाबदेह और सुलभ नेतृत्व की तलाश करने पर मजबूर किया है।

कांग्रेस से अजीत चौधरी मैदान में, मुकाबले में आई सियासी तपिश

वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस बार नए समीकरण साधते हुए अजीत चौधरी को प्रत्याशी बनाया है, जिन्होंने मैदान में उतरकर मुकाबले को बेहद कड़ा और रोचक बना दिया है। अजीत चौधरी अपनी पार्टी के पारंपरिक आधार को एकजुट करने और कार्यकर्ताओं को लामबंद करने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

हालांकि, दलपत सोनी का कहना है कि यह मुकाबला किसी दल विशेष से नहीं, बल्कि उस सोच से है जो चुनाव जीतने के बाद जनता को भूल जाती है। वे कहते हैं, “नगर निगम का बजट चंद ठेकेदारों के मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि हर रेहड़ी-पटरी वाले, दुकानदार और गृहिणी के सम्मानजनक जीवन के लिए है।” दिनेश गुप्ता के मजबूत संगठनात्मक साथ और जनता के आक्रोश के बीच दलपत सोनी की यह सादगी भरी, आक्रामक मुहिम अब वार्ड-6 के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह अपने पक्ष में मोड़ती नजर आ रही है।

 

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