
उदयपुर। क्या मेवाड़ के जनप्रतिनिधियों ने अपनी रीढ़ की हड्डी ताक पर रख दी है? यह सवाल आज उदयपुर के हर उस अधिवक्ता और नागरिक की जुबान पर है, जिसने राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया का बयान सुना है, जिसने दशकों पुराने आंदोलन की गरिमा को ठेस पहुँचाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने मौन साधे खड़े नेताओं की पोल जब वकीलों ने खोली, तो सांसद गरासिया ने समर्थन देने के बजाय ऐसा ‘कटाक्ष’ किया जिससे भाजपा की अंदरूनी राजनीति में हड़कंप मच गया है।
मुख्यमंत्री के जाते ही जब वकीलों ने स्थानीय नेताओं को उनकी ‘चुप्पी’ पर आईना दिखाया, तो सांसद गरासिया ने अपना आपा खो दिया। उन्होंने वकीलों से दो-टूक कहा— “पंजाब वालों से भी करो मांग।”
यह सीधा हमला पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया पर था। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि गरासिया ने न केवल एक संवैधानिक मर्यादा लांघी है, बल्कि उदयपुर की जनता की जायज मांग को ‘फुटबॉल’ बनाकर एक पाले से दूसरे पाले में फेंक दिया है।
वकीलों का आक्रोश : “वोट के समय याद आता है मेवाड़, काम के वक्त पंजाब?”
अधिवक्ताओं ने गरासिया के इस बयान को ‘जख्मों पर नमक’ बताया है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तीखे लहजे में कहा-“सांसद साहब! आपको राज्यसभा भेजने में भी पंजाब वालों की भूमिका कहीं न कहीं रही होगी?
“अगर मांग कटारिया जी से ही करनी है, तो जनता आपको दिल्ली और जयपुर क्यों भेजे?”
गरासिया खुद कटारिया के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इस तरह की ‘ बयानबाजी’ ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि वे अब इन जनप्रतिनिधियों की ‘दोहरी चाल’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
जनप्रतिनिधियों की ‘चुप्पी’ ने खोली पोल
जब मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जा रहा था, तब टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सीपी जोशी और स्थानीय विधायक ताराचंद जैन जैसे दिग्गज वहीं मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी मजबूती से उदयपुर का पक्ष नहीं रखा। वकीलों ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि जो नेता सीएम के सामने मुंह नहीं खोल सकते, वे जयपुर में मेवाड़ का हक क्या खाक दिलवाएंगे?
About Author
You may also like
शिक्षा, अध्यात्म और संस्कृति के सच्चे प्रहरी : डॉ. प्रदीप कुमावत को श्री गुरु एवं ‘मालव राज अलंकरण’ से सम्मान
उदयपुर नगर निगम : दिनेश भट्ट होंगे डिप्टी मेयर, भाजपा ने लगाई अंतिम मुहर, कांग्रेस प्रत्याशी हो सकते हैं लक्ष्मीनारायण मेघवाल
श्रीमान कलेक्टर साहब एवं एसपी साहब, ज़रा इधर भी नज़र डालिए!
पर्दे के पीछे: कोई तो तिलिस्म था, जिसने पारस को पारस बना दिया
तस्वीरों का आईना : नए मेयर का जश्न, जज़्बात और सियासत
