गुनाह का ‘फार्महाउस’ : जब इवेंट के नाम पर बिछाया गया जाल

उदयपुर। सपनों के शहर मुंबई की चकाचौंध से दूर, झीलों की नगरी उदयपुर के एक सुनसान फार्महाउस में सन्नाटा पसरा था। लेकिन उस खामोशी के पीछे एक खौफनाक साजिश रची जा रही थी। इवेंट मैनेजमेंट के बहाने मुंबई की एक युवती को उदयपुर बुलाना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि करण सिंह नाम के शिकारी का बुना हुआ जाल था।

साजिश की शुरुआत : करीब एक महीने पहले, करण ने खुद को मैरिज गार्डन का मालिक बताकर युवती को नौकरी का झांसा दिया। भरोसा और बेहतर भविष्य की उम्मीद में वह उदयपुर आ तो गई, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस फार्महाउस को वह अपना ठिकाना समझ रही है, वही उसकी कैदगाह बन जाएगा। 12 जनवरी की वह काली रात जब आधी दुनिया सो रही थी, रात के 2 बजे करण अपने दो साथियों—हितेश और भूरा—के साथ कमरे में दाखिल हुआ। वहां जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। युवती की चीखें उस सुनसान फार्महाउस की दीवारों में ही दम तोड़ गईं।

पुलिस की एंट्री – 4 घंटे का ‘हंट’ : 15 जनवरी को जब पीड़िता सुखेर थाने पहुंची, तो उसकी आंखों में खौफ और इंसाफ की उम्मीद दोनों थी। मामला संवेदनशील था, इसलिए उदयपुर एसपी योगेश गोयल ने बिना वक्त गंवाए कमांड संभाली। सुखेर थानाधिकारी रविन्द्र चारण और प्रशिक्षु आरपीएस जगदीश विश्नोई की टीम हरकत में आई।

आधुनिक तकनीक (Technical Surveillance) और मुखबिरों के नेटवर्क को सक्रिय किया गया। पुलिस के पास समय कम था, क्योंकि आरोपी शहर छोड़ने की फिराक में थे। पुलिस की टीम ने अलग-अलग दिशाओं में दबिश दी। नतीजा यह रहा कि रिपोर्ट दर्ज होने के महज 240 मिनट (4 घंटे) के भीतर मुख्य आरोपी करण सिंह और हितेश पुलिस के शिकंजे में थे।

अंधेरे का खुलासा : पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि भरोसे का कत्ल था। जिस आरोपी ने युवती को ‘मैरिज गार्डन’ का सपना दिखाया, वह उसे गलत कामों में धकेलना चाहता था। इनकार करने पर उसने अपने नौकर और दोस्त के साथ मिलकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

फिलहाल, सलाखों के पीछे करण और हितेश से पूछताछ जारी है। सुखेर पुलिस की इस मुस्तैदी ने अपराधियों को यह कड़ा संदेश दिया है कि उदयपुर की शांत फिजाओं में गुनाह करने वालों की जगह सिर्फ जेल की कोठरी है।

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