बारामती | महाराष्ट्र की राजनीति का एक चमकता सितारा आज हमेशा के लिए अस्त हो गया। सूबे के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजित पवार आज पंचतत्व में विलीन हो गए। बारामती की जिस मिट्टी से उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था, उसी मिट्टी ने आज उन्हें अपने आगोश में ले लिया। जब उनके दोनों बेटों ने भारी मन से उन्हें मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें छलक उठीं।
भीगी आंखों से विदा हुआ ‘दादा’
अजित पवार, जिन्हें समर्थक प्यार से ‘दादा’ पुकारते थे, उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। सड़कों पर तिल रखने की जगह नहीं थी; हर चेहरा गमगीन था और हर जुबां पर बस एक ही नाम था। अपने नेता की एक आखिरी झलक पाने के लिए लोग घरों की छतों और पेड़ों पर चढ़े नजर आए। बारामती की हवाओं में आज एक अजीब सा सन्नाटा और भारीपन था।
कांपते हाथों ने दी अंतिम विदाई
काटेवाड़ी स्थित उनके पैतृक आवास पर जब पार्थिव शरीर लाया गया, तो परिवार के सदस्यों का विलाप देख वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा मुंह को आ गया। राजकीय सम्मान के साथ जब तिरंगे में लिपटे ‘दादा’ को अंतिम सलामी दी गई, तो माहौल और भी भावुक हो गया। इस मौके पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के दिग्गज नेता—अमित शाह, नितिन गडकरी और राज ठाकरे—भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे, जिनकी आंखों में अपने एक साथी को खोने का दुख साफ झलक रहा था।
वो काली सुबह और अधूरा सफर
बुधवार की वो सुबह महाराष्ट्र के लिए काल बनकर आई। सुबह 8:45 बजे हुए उस विमान हादसे ने न केवल एक अनुभवी राजनेता को हमसे छीना, बल्कि पांच परिवारों के चिराग बुझा दिए। तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित है, सरकारी इमारतों पर झुका हुआ तिरंगा मानो महाराष्ट्र के इस भारी नुकसान पर शोक व्यक्त कर रहा है।
अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन विकास की उनकी जिद और जनता से उनका जुड़ाव महाराष्ट्र की राजनीति के इतिहास में हमेशा जीवित रहेगा।
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