
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर देश को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल उत्तराखंड की कनेक्टिविटी में एक नए युग की शुरुआत की, बल्कि सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश का मार्गदर्शन भी किया।
विकास के नए द्वार खोलेगा इकोनॉमिक कॉरिडोर
प्रधानमंत्री ने इस एक्सप्रेसवे को केवल एक सड़क नहीं बल्कि प्रगति का द्वार बताया। उन्होंने कहा कि यह इकोनॉमिक कॉरिडोर नए उद्योगों, कारखानों और व्यापारिक संभावनाओं के लिए रास्ता तैयार करेगा, जिससे पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होगा। पीएम ने दोहराया कि बाबा केदार के आशीर्वाद से इस सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक साबित हो रहा है।
अंबेडकर जयंती पर सामाजिक न्याय का संकल्प
डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के अवसर पर बाबा साहेब को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पिछले एक दशक से संविधान की गरिमा को पुनः स्थापित करने में जुटी है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के हटने और नक्सलवाद के खात्मे को संविधान की सच्ची जीत बताया। साथ ही, समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में उत्तराखंड के अग्रणी कदम की भी सराहना की।
महिला सशक्तीकरण: 2029 तक आरक्षण का लक्ष्य
संबोधन का एक बड़ा हिस्सा नारी शक्ति को समर्पित रहा। पीएम मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
लक्ष्य: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यह आरक्षण प्रभावी हो जाना चाहिए।
विशेष चर्चा: इस विषय पर 16 अप्रैल से संसद में विशेष चर्चा शुरू होगी।
खुला पत्र: पीएम ने देश की सभी महिलाओं के नाम एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल में भागीदार बनने का आह्वान किया है।
त्योहारों की दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में वैसाखी, बोहाग बिहू और पुथंडु जैसे त्योहारों की बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘डबल इंजन’ सरकार की नीतियों से उत्तराखंड अपनी स्थापना के 26वें वर्ष में नई ऊंचाइयों को छुएगा।
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