
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए देश की नारी शक्ति को नमन किया। बैसाखी और विभिन्न राज्यों के नव वर्ष समारोहों की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार के संकल्प को दोहराया।
प्रधानमंत्री के भाषण का मूलपाठ यहां पढ़िए
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: लोकतंत्र की नई नींव
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भारत के 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक बताया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य विधानसभाओं और संसद में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु इस अधिनियम को समय पर लागू करने के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष बजट सत्र बुलाया जाएगा।
“पंचायत से संसद तक की यात्रा अब सुगम होने वाली है। हमारा लक्ष्य संवाद और सहयोग के माध्यम से महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा बनाना है।” – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
महिला नेतृत्व के बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति में महिलाओं के योगदान के प्रमुख आंकड़ों पर प्रकाश डाला:
स्थानीय शासन: पंचायती राज संस्थाओं में 14 लाख से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 50% तक पहुँच गई है।
आर्थिक सशक्तिकरण: ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत 3 करोड़ से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। मुद्रा योजना के 60% ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।
संपत्ति का अधिकार: पीएम आवास योजना के तहत 3 करोड़ से अधिक घरों का पंजीकरण महिलाओं के नाम पर किया गया है।
शिक्षा और अनुसंधान: उच्च शिक्षा में बेटियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। विशेषकर STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 43% तक पहुँच गई है।
सुरक्षा और तकनीक में नया भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में विश्व के किसी भी देश की तुलना में सबसे अधिक महिला पायलट हैं। रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी बेटियां ‘पुरु़ष प्रधान’ होने की पुरानी सोच को तोड़ रही हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता में ई-एफआईआर और जीरो-एफआईआर जैसे प्रावधानों के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को और अधिक सरल और संवेदनशील बनाया गया है।
भविष्य का संकल्प
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने महिलाओं से अपील की कि वे इस अभियान को सोशल मीडिया और व्यक्तिगत चर्चाओं के माध्यम से देश के हर गांव तक पहुँचाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि जब महिलाएं नीति निर्धारण में पूर्ण भागीदार बनेंगी, तभी ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होगा।
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