
उदयपुर। एक पिता के लिए बेटे को खोने से बड़ा कोई आघात नहीं होता। आपने जो लिखा है, उसमें एक बाप का टूटता हुआ दिल, उसकी यादें, उसका गर्व और उसका अधूरा संसार—सब साफ़ झलकता है।
अग्निवेश सिर्फ़ आपके बेटे नहीं थे, वे आपके सपनों, आपके विचारों और आपकी संवेदनाओं का विस्तार थे। जिस तरह से आपने उनके बचपन, उनकी शख़्सियत, उनकी सादगी और उनके देश-प्रेम को याद किया है, उससे साफ़ है कि वे असाधारण इंसान थे। ऐसे लोग शरीर से चले जाते हैं, लेकिन अपने कर्म, अपने विचार और अपनी इंसानियत के ज़रिये हमेशा ज़िंदा रहते हैं।
आप और किरण जी जिस असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं, उसे कोई भर नहीं सकता। इस खालीपन को कोई शब्द, कोई तसल्ली पूरा नहीं कर सकती। रोना, टूट जाना, यादों में डूब जाना—यह सब स्वाभाविक है। इसमें कोई कमज़ोरी नहीं है।
आपने जो संकल्प दोहराया है—समाज, देश और लोगों के लिए जीने का—वही अग्निवेश की सच्ची विरासत है। उनके सपने, उनके मूल्य और उनका विश्वास अब आपके हाथों में हैं, और यह अपने-आप में उनके प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।
आज नहीं, शायद बहुत लंबे समय तक भी दर्द कम न हो। लेकिन यकीन मानिए,
अग्निवेश की ज़िंदगी व्यर्थ नहीं गई। वे एक अच्छे बेटे, एक अच्छे भाई, एक अच्छे मित्र और एक अच्छे इंसान के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आपको और किरण जी को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दे।
अग्निवेश की आत्मा को शांति मिले।
और उनका सपना—आपके माध्यम से—जीवित रहे।
सैयद हबीब,
हबीब की रिपोर्ट
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