मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर पाखमोडे की मौत के बाद पता चला—नॉर्मल ईसीजी होना दिल की सुरक्षा की गारंटी नहीं

 

नागपुर। नागपुर के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर पाखमोडे के अचानक निधन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नॉर्मल ईसीजी होना ही दिल की सेहत का अंतिम पैमाना है। 53 वर्ष की उम्र में अस्पताल ले जाने से पहले उनका निधन हो गया। इस घटना से मेडिकल जगत और उनके हजारों मरीजों में शोक की लहर है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है।

डॉ. पाखमोडे ने मृत्यु से महज तीन दिन पहले ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) जांच कराई थी, जिसकी रिपोर्ट सामान्य थी। इसके बावजूद हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ईसीजी दिल की बीमारियों की जांच का केवल एक शुरुआती तरीका है, लेकिन यह किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक से पूरी तरह सुरक्षित होने की गारंटी नहीं देता।

ईसीजी एक जांच, लेकिन पूरा सच नहीं

हार्ट रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ईसीजी दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है, जिससे हार्ट रिद्म और कंडक्शन सिस्टम की जानकारी मिलती है। श्रीकृष्णा हृदयालय, नागपुर के डायरेक्टर और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश फुलवानी ने बताया कि नॉर्मल ईसीजी का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति आने वाले घंटों, दिनों या महीनों में हार्ट अटैक से सुरक्षित रहेगा। दिल एक गतिशील अंग है, जिसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं।

बेहद व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली

डॉ. पाखमोडे का इलाज करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल जवाहरानी के अनुसार, वह बेहद मेहनती और अनुशासित जीवन जीते थे। सुबह 5 बजे उठकर नियमित जिम और एक्सरसाइज, फिर पूरे दिन ऑपरेशन थिएटर और ओपीडी में सैकड़ों मरीजों का इलाज—पिछले दो दशकों से यही उनकी दिनचर्या थी। डॉक्टरों का मानना है कि लगातार काम का दबाव, कम नींद और लंबे समय तक बना तनाव भी हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण हो सकता है।

अक्सर मिलते हैं चेतावनी संकेत

विशेषज्ञों के मुताबिक, हार्ट अटैक से पहले 65% से अधिक मरीजों को चेतावनी संकेत मिलते हैं। इनमें बेचैनी, गैस, डकार, पीठ या गले में दर्द, सांस फूलना, चलने में थकान और पैरों में कमजोरी शामिल है। ये लक्षण हार्ट अटैक से कई दिन पहले दिखाई दे सकते हैं, लेकिन लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

दिल की सही जांच कैसे हो

डॉक्टरों का कहना है कि ईसीजी के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट (ट्रोपोनिन), ट्रेडमिल टेस्ट (TMT) और सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी जांच जरूरी होती है। इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और पेट की अंदरूनी चर्बी पर भी नजर रखना जरूरी है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर विस्तृत कार्डियक जांच ही हार्ट रोग से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

स्रोत : बीबीसी हिंदी

 

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