
दुबई/तेहरान।
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। इस जवाबी कार्रवाई से कतर, सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे देशों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। इस वक्त सभी मुस्लिम देशों में रमजान और ईद का पर्व मनाया जाना है।
कतर और सऊदी अरब पर हमला: ईरान के मिसाइल हमलों ने कतर के मुख्य गैस संयंत्र रास लफ्फान को भारी नुकसान पहुँचाया है। इसके जवाब में कतर ने ईरानी सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं, सऊदी अरब ने अपनी दो रिफाइनरियों पर हुए हमले के बाद सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।
कुवैत और यूएई की घेराबंदी: कुवैत की मीना अब्दुल्ला और मीना अल-अहमदी रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले हुए हैं, जिससे वहां भीषण आग लग गई। यूएई ने भी अपने हबशान गैस सुविधा और बाब तेल क्षेत्र पर हुए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
चीन और फ्रांस की प्रतिक्रिया : चीन ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की हत्या को ‘अस्वीकार्य’ बताया है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की आलोचना करते हुए उन पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) : ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों और शिपिंग रूटों पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ब्रिटेन और अमेरिका इस मार्ग को खुला रखने के लिए योजना बना रहे हैं।
बड़ा बजट : रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक की राशि की मांग की है।
मानवीय संकट : लेबनान में इजरायली हमलों के कारण 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। पिछले 24 घंटों में इजरायल में भी 170 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
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