
वाशिंगटन। “डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और अरबपतियों के एजेंडे के खिलाफ, अमेरिका की धरती पर उठी आवाज़ें… वाशिंगटन से लेकर कैलिफोर्निया तक, न्यू हैम्पशायर से फ्लोरिडा तक… हाथ मत हटाओ… खामोश मत रहो! सैकड़ों शहरों की फिज़ा में गूंजा विरोध का ऐलान।”
अमेरिका शनिवार को एकजुट हुआ — विरोध में, प्रतिरोध में और अपने लोकतांत्रिक मूल्यों की हिफाज़त में। “हैंड्स ऑफ” यानी “हाथ मत हटाओ” नाम से हुए इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन ने 1,000 से अधिक शहरों को अपने आंदोलन की लपटों से जोड़ा। वाशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल से लेकर वेंचुरा, कैलिफ़ोर्निया तक, विरोध करने वालों की आवाज़ें ट्रंप की नीतियों और “सत्तावादी रवैये” के खिलाफ खुलकर सामने आईं।
डीसी में, ट्रंप के कार्यकाल के बाद यह पहला बड़ा सार्वजनिक विरोध था, जिसमें करीब 500,000 लोग शामिल हुए। न्यू हैम्पशायर की डायने कोलिफ्राथ अपने 100 साथियों के साथ लंबा सफर तय कर यहां पहुंचीं। उन्होंने कहा—“इसका उद्देश्य लोगों को खड़ा करना है। जब बाकी अमेरिकी देखेंगे कि हम खड़े हैं, तो उन्हें भी हिम्मत मिलेगी।”
प्रदर्शनकारियों के हाथों में थे बैनर, जिन पर साफ़ लिखा था —
“डेमोक्रेसी बिकाऊ नहीं”
“हम चुप नहीं रहेंगे”
“ट्रंप, तानाशाही बंद करो”
कुछ लोगों ने यूक्रेनी झंडे भी लहराए, रूस के साथ ट्रंप प्रशासन के “दोस्ताना रुख” पर नाराज़गी जताते हुए।
फ्लोरिडा से लेकर हॉलीवुड तक, एक ही सुर में लोगों ने लोकतंत्र को बचाने की बात कही। हॉलीवुड की एक प्रदर्शनकारी ने कहा — “ये सिर्फ ट्रंप विरोध नहीं, ये उम्मीद का आंदोलन है। हम अमेरिका के असली चेहरे को बचा रहे हैं।”
यह सिर्फ विरोध नहीं, एक संदेश है — कि डरने वालों की भीड़ में अब साहसी खड़े हो रहे हैं। अमेरिका की सड़कों पर गूंजती ये आवाज़ें बता रही हैं कि लोकतंत्र अब भी ज़िंदा है… और लोग अब भी जागे हुए हैं। हाथ हटाना अब मुमकिन नहीं… ये ‘हाथ मत हटाओ’ का संकल्प है।
स्रोत : द गार्जियन
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