
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से मिले अधजले नोटों की जांच रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में शामिल वीडियो और तस्वीरों में 500 के जले हुए नोटों की गड्डियां दिखाई गई हैं। इस सनसनीखेज मामले के चलते सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्य करने से रोक दिया है, और उनके पिछले छह महीने के कॉल रिकॉर्ड की जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
14 मार्च की रात जस्टिस वर्मा के बंगले के स्टोर रूम में आग लगी थी। जब दमकल कर्मियों ने आग बुझाई, तो उन्हें 4-5 बोरियां मिलीं जिनमें अधजले नोट भरे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा ने इन पैसों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है और इसे एक साजिश करार दिया है।
CJI के तीन अहम सवाल : इतनी बड़ी रकम जस्टिस वर्मा के घर कैसे पहुंची? इस पैसे का स्रोत क्या है? 15 मार्च की सुबह जले हुए नोटों को कमरे से हटाने वाला कौन था?
CJI के निर्देश : जस्टिस वर्मा के घर की सुरक्षा व्यवस्था और वहां तैनात गार्ड्स की पूरी जानकारी दी जाए। जस्टिस वर्मा की पिछले छह महीने की कॉल डिटेल निकाली जाए। जस्टिस वर्मा अपने फोन से कोई भी डेटा डिलीट न करें।
जस्टिस वर्मा की सफाई : उन्होंने कहा कि जिस स्टोर रूम में आग लगी, वहां उनका कोई निजी सामान नहीं था। यह खुली जगह थी, जहां किसी का भी आना-जाना हो सकता था। उन्होंने इसे उनकी छवि धूमिल करने की साजिश बताया और कहा कि यह मामला दिसंबर 2024 में उन पर लगे झूठे आरोपों से जुड़ा हो सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट की इंटरनल रिपोर्ट : दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्टोर रूम अक्सर बंद रहता था, लेकिन वहां सिर्फ घर में रहने वाले लोग, नौकर और सीपीडब्ल्यूडी कर्मी ही जा सकते थे। रिपोर्ट में संदेह जताया गया कि कोई बाहरी व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है।
क्या यह मामला नया है? : यह पहला मौका नहीं है जब जस्टिस वर्मा विवादों में घिरे हों। 2018 में भी उनके नाम पर 97.85 करोड़ के घोटाले में CBI ने FIR दर्ज की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इस मामले की जांच बंद करवा दी थी।
अब आगे क्या? :
जस्टिस वर्मा को फिलहाल कोई भी नया केस नहीं सौंपा जाएगा।
जांच एजेंसियां उनके कॉल डिटेल और सिक्योरिटी फुटेज की समीक्षा करेंगी।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा।
क्या यह सच में साजिश है या फिर हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार का एक और मामला? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से मिल सकता है।
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