
नई दिल्ली। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) के तहत मल कीचड़ प्रबंधन (एफएसएम) के नवोन्मेषी मॉडलों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ वर्चुअल संवाद आयोजित किया। इस संवाद का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और समावेशी स्वच्छता समाधान साझा करना और राज्यों के बीच आपसी ज्ञानवर्धन को बढ़ावा देना था।
संवाद में जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना, संयुक्त सचिव एवं SBM-G मिशन निदेशक ऐश्वर्या सिंह सहित जिला कलेक्टर, पंचायत प्रमुख, स्वयं सहायता समूह और राज्य नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
सी.आर. पाटिल ने समुदाय-आधारित एफएसएम पहलों की सराहना करते हुए कहा कि ये मॉडल ग्रामीण स्वच्छता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ रोजगार और आजीविका के अवसर भी सृजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में लागू किए गए समाधान यह दर्शाते हैं कि कठिन परिस्थितियां स्थायी और प्रभावी स्वच्छता मॉडल को जन्म देती हैं।
संवाद में गुजरात, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, लद्दाख और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने अपने सफल मॉडलों को प्रस्तुत किया। इनमें ओडिशा के खुर्दा जिले का ट्रांसजेंडर-आधारित स्वयं सहायता समूह एफएसटीपी संचालन, मध्य प्रदेश के इंदौर में मल्टी-रिसोर्स प्लांट और उपचारित अपशिष्ट जल में मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग, कर्नाटक के क्लस्टर-आधारित मॉडल और लद्दाख में इकोसैन शौचालय जैसी पहलें शामिल थीं।
जल शक्ति मंत्री ने कहा कि एफएसएम ग्रामीण स्वच्छता का महत्वपूर्ण घटक है और इसे व्यवहार्य, समावेशी और दीर्घकालिक बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी, पंचायतों और संदर्भ-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी स्वच्छता आंदोलन की सफलता और गांधीजी के स्वच्छता एवं जनभागीदारी संदेश को हर गांव तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विकसित नवोन्मेषी, समुदाय-केन्द्रित और समावेशी मॉडलों को बढ़ावा देने और तकनीकी सहायता व क्षमता निर्माण जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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