देहरादून। उत्तरकाशी के सिलक्यारा गांव में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 40 मज़दूरों का हौसला अब टूटने लगा है। 7 दिन में भी ऑपरेशन सफल नहीं हो सका है। मजदूरों को निकालने का काम फिलहाल ठप सा पड़ गया है। अंदर फंसे मज़दूरों के परिजनों के बीच मायूसी हो गई है।
तकनीकी कारणों sevअंदर फंसे मज़दूरों को निकलने के काम में रुकावट आई है और फिलहाल काम रुका हुआ है।
दिल्ली से लाई गई ऑगर मशीन ने शुक्रवार शाम से काम करना बंद कर दिया है।
इंदौर से एक नई मशीन लाई गई है जिसे अब सुरंग के 200 मीटर अंदर ले जाया जा रहा है ताकि रुके हुए काम को आगे बढ़ाया जा सके।
अब तक टनल के अंदर 70 मीटर में फैले मलबे में 24 मीटर छेद किया जा चुका है. लेकिन अधिकारी अब दूसरे विकल्प खोजने की भी कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय से भेजे गए विशेषज्ञों और सलाहकारों की टीम ने शनिवार को टनल के ऊपर पहाड़ का जायज़ा लिया.
उन्होंने बाद में पत्रकारों से कहा कि वो पहाड़ के ऊपर से सीधे नीचे टनल में छेद करने के विकल्प पर चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने पहाड़ पर चार पॉइंट्स की शिनाख्त कर ली है जहाँ से छेद किया जा सकता है।
इस पर उनकी बैठक जारी है. पहाड़ के ऊपर से सीधे नीचे छेद करने के लिए 103 मीटर छेद करना पड़ेगा और ये एक जोख़िम भरा हो सकता है।
टनल के अंदर फंसे मज़दूरों के परिजन और उनके साथ काम करने वाले मज़दूर काफ़ी नाराज़ नज़र आ रहे थे।
कल तक उनमे से कई अपनी कंपनी के डर के कारण पत्रकारों से बात करने से कतरा रहे थे लेकिन शनिवार को उनके सब्र का पैमाना छलकता दिखाई दिया।
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