
मुंबई | मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) से जूझ रहीं एक उभरती पैरा ओलंपियन तीरंदाज़ ने 20 वर्षों बाद फिर से चलना शुरू कर दिया है। संरचित प्रिसीजन आयुर्वेद कार्यक्रम के जरिए उन्हें नई ज़िंदगी मिली है। इस साल की शुरुआत में वह अपोलो आयुर्वैद अस्पताल पहुँची थीं, जहाँ वे पिछले दो दशकों से लगभग पूरी तरह व्हीलचेयर पर निर्भर थीं।
करीब तीन दशकों से एमएस के साथ जी रहीं करेन लगातार पुराने दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और चलने में असंतुलन से परेशान थीं। उन्हें यह भी बताया गया था कि पारंपरिक चिकित्सा में अब उनकी गतिशीलता सुधारने के सीमित विकल्प ही बचे हैं। चेन्नई में प्रशिक्षण के दौरान करेन ने यह जानने के लिए आयुर्वेद का सहारा लेने का फैसला किया कि क्या एक सुव्यवस्थित आयुर्वेदिक उपचार उनकी चलने-फिरने की क्षमता, मांसपेशियों की ताकत और समग्र कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है।
करेन ने अस्पताल में न्यूरोलॉजिकल और ऑटोइम्यून रोगों की विशेषज्ञ डॉ. सुस्मिता सी से परामर्श लिया और एक सघन प्रिसीजन आयुर्वेद कार्यक्रम में शामिल हुईं। विस्तृत मूल्यांकन के बाद तैयार किए गए उपचार में शास्त्रीय पंचकर्म थेरेपी, लक्षित आयुर्वेदिक दवाइयाँ, चिकित्सकीय आहार और केंद्रित न्यूरो-रिहैबिलिटेशन को शामिल किया गया।
प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में मापनीय परिणामों के महत्व को देखते हुए करेन की यात्रा को क्लिनिकल कठोरता के साथ दस्तावेज़ किया गया। उनकी प्रगति को मापने के लिए एक्सपैंडेड डिसएबिलिटी स्टेटस स्केल (EDSS), बर्ग बैलेंस स्कोर और एमएस-विशिष्ट कार्यात्मक आकलनों जैसे मानक पैमानों का उपयोग हर चरण में किया गया।
डॉ. सुस्मिता सी ने कहा, “करेन लंबे समय से कार्यात्मक सीमाओं के साथ आई थीं और पारंपरिक उपचार में उनके लिए विकल्प सीमित थे। हमारा उद्देश्य चरणबद्ध, चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित कार्यक्रम तैयार करना था, जो उनकी बीमारी के मूल कारणों को संबोधित करे। थेरेपी, आहार और फिजियोथेरेपी—हर पहलू को उनकी क्लिनिकल प्रोफाइल और एथलेटिक आवश्यकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत बनाया गया। यह समेकित दृष्टिकोण शरीर, मन और आत्मा—तीनों का ख्याल रखता है और तात्कालिक सुधार के साथ दीर्घकालिक कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि करेन अब कंसोलिडेशन थेरेपी और स्ट्रेंथ डेवलपमेंट जारी रखे हुए हैं और दीर्घकालिक योजना के तहत आगे और सुधार की उम्मीद है।
करेन ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, “करीब 30 साल एमएस के साथ जीते हुए मैंने सीमाओं के साथ समझौता करना सीख लिया था, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि वास्तविक गतिशीलता फिर से मिल पाएगी। यहाँ की टीम के साथ काम करना मेरे लिए शारीरिक ही नहीं, मानसिक और भावनात्मक रूप से भी परिवर्तनकारी रहा। वर्षों बाद अपने पैरों पर खड़ा होना ऐसा लगा, जैसे मैंने खुद का एक खोया हुआ हिस्सा वापस पा लिया हो। अब मैं अपने तीरंदाज़ी अभ्यास में निचले अंगों का केंद्रित प्रशिक्षण जोड़ पा रही हूँ, और संतुलन व ताकत की वापसी मुझे सशक्त महसूस कराती है।”
उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें 2028 लॉस एंजिलिस पैरा ओलंपिक्स में प्रतिस्पर्धा करने के अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए नया आत्मविश्वास और प्रेरणा दी है।
करेन, जो पेशे से फार्मासिस्ट भी हैं और खेलों में दिव्यांगता की दृश्यता व पहुंच की समर्थक हैं, ने अपनी स्वास्थ्य चुनौती को उद्देश्य में बदल दिया है। वह अमेरिकी राष्ट्रीय पैरा तीरंदाज़ी टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और दो विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर दूसरों को सीमाओं से परे संभावनाओं पर विश्वास करने की प्रेरणा दे रही हैं।
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