काल्पनिक न्यायालय ने प्रार्थी के पक्ष में पारित की विवाह विच्छेद की डिक्री, डॉ. अनुष्का विधि महाविद्यालय में हुआ मूट कोर्ट का आयोजन

उदयपुर। डॉ. अनुष्का विधि महाविद्यालय के निदेशक डॉ. एस. एस. सुराणा ने बताया कि एलएल.बी. तृतीय वर्ष के विधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद हारुन छीपा के निर्देशन में आज दिनांक 19 मार्च, 2024 को महाविद्यालय में विवाह विच्छेद के मामले में मूट कोर्ट का आयोजन किया गया| कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संस्थान की अध्यक्षा श्रीमती कमला सुराणा थी एवं अध्यक्षता संस्थान के सचिव राजीव सुराणा ने की।

डॉ. सुराणा ने बताया की मूट कोर्ट विधि के अध्ययन का महत्वपूर्ण भाग है, जिसका संचालन विद्यार्थियों द्वारा किया जाता है ताकि विद्यार्थियों को न्यायालय की कार्यप्रणाली से अवगत कराया जा सके। विधि विषय में प्रायोगिकता का होना अतिआवश्यक है और यही मूट कोर्ट के माध्यम से कराया जाता है। आज का मूट कोर्ट आशुतोष बनाम कल्पना नामक कल्पनिक वाद पर आधारित था। यह दावा हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 (1) (i-क) एवं 13 (1) (i-ख) के तहत क्रूरता एवं अभित्यजन के आधार पर प्रार्थी आशुतोष की ओर से लाया गया। प्रार्थी की ओर से टीना डांगी, रितु कश्यप व सुरभि सिंघवी ने एवम् अप्रार्थिनी पक्ष की ओर से काव्य मकनावत, अभिषेक मौर्य व महिमा पोरवाल ने पैरवी की। प्रार्थी पक्ष की ओर से गवाह की भूमिका राकेश खराड़ी, धुलेश्वर वरहात, रतन सिंह सिसोदिया, रवीना दक ने एवं अप्रार्थिनी की ओर से उषा माली, पवन प्रकाश माहेश्वरी, सूर्यप्रकाश पालीवाल ने अदा की। हलकारे की भूमिका में नरेन्द्र सिंघल रहे। न्यायालय द्वारा मामले में तीन तनकीयाँ बनाई गई तनकी संख्या 1 को प्रार्थी साबित करने में सफल रहा। तनकी संख्या 2 को गवाह कमजोर होने के कारण अप्रार्थिनी पक्ष साबित करने में असफल रहा। मूट कोर्ट में चिराग कावड़िया ने बतौर न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय के इस मामले में अपना निर्णय सुनाया तथा विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. क्षेत्रपाल सिंह ने कहा कि मूट कोर्ट की प्रक्रिया में भाग लेने से विधार्थियों में बोलने की तथा परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। चूँकि एलएल.बी. तृतीय वर्ष के छात्र कुछ समय बाद ही बतौर वकील न्यायालय में अपनी उपस्थिति देंगे इसलिए इन विधार्थियों के लिए मूट कोर्ट एक बेहतरीन मंच साबित होता है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मोहम्मद हारून छीपा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सहायक आचार्य डॉ. रंजना सुराणा, मंजू कुमावत, प्रज्ञा खजांची एवं प्रथमेश गमेती उपस्थित थे।

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