80वें स्वतंत्रता दिवस पर महिला सशक्तीकरण की मिसाल: 25 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, 26.3% महिला कार्यबल के साथ माइनिंग सेक्टर में अग्रणी
उदयपुर। देश जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, राजस्थान के ग्रामीण अंचलों से लेकर आधुनिक औद्योगिक संयंत्रों तक महिलाएं अपनी मेहनत, कौशल और तकनीकी दक्षता के दम पर सच्ची ‘आर्थिक स्वतंत्रता’ की नई इबारत लिख रही हैं। वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक की विभिन्न समावेशी पहलों के जरिए आज महिलाएं न केवल अपने परिवारों की तकदीर बदल रही हैं, बल्कि भूमिगत खदानों, भारी मशीनरी और एआई (AI) आधारित ऑटोमेशन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों का नेतृत्व भी कर रही हैं।
कंपनी के कार्यबल में 26.3 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो देश के मेटल एवं माइनिंग सेक्टर में सर्वाधिक है।
‘सखी’ और ‘समाधान’ से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को बचत, ऋण, उद्यमिता और आजीविका से जोड़ने के लिए चलाई जा रही सीएसआर पहलों ने जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव किए हैं:
25,000+ महिलाएं जुड़ीं ‘सखी’ पहल से: स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाएं वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ‘सखी उत्पादन समिति’ से जुड़ी फरजाना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। कभी घरेलू श्रम करने वाली फरजाना आज परिधान व एफएमसीजी उत्पाद निर्माण इकाई का संचालन कर सालाना करीब 3.47 लाख रुपये कमा रही हैं।
डेयरी व्यवसाय में प्रेम बाई की सफलता: ‘समाधान’ पहल से जुड़ी मटून गांव की प्रेम बाई व्यास ने अपने डेयरी व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। बिचौलियों पर निर्भरता खत्म कर अब वे 20 पशुओं की डेयरी संभाल रही हैं। उनका दूध उत्पादन 10 लीटर से बढ़कर 85 लीटर प्रतिदिन हो गया है, जिससे वे हर महीने 90 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
भूमिगत खदानों से लेकर एआई (AI) और डिजिटलीकरण तक महिला नेतृत्व

हिंदुस्तान जिंक के संयंत्रों और खदानों में महिलाओं की भागीदारी केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वे तकनीकी नवाचारों का नेतृत्व कर रही हैं:
‘तेजस्विनी’ पहल और मैन्युफैक्चरिंग कमान: चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के लीचिंग एवं प्यूरिफिकेशन सेक्शन में महिलाओं की टीम पूरी शिफ्ट का संचालन सफलतापूर्वक संभाल रही है।
एआई और ऑटोमेशन का नेतृत्व: देबारी जिंक स्मेल्टर में आईआईटी दिल्ली से स्नातक स्वप्निल थोरी डिजिटलाइजेशन विभाग का नेतृत्व कर रही हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के जरिए स्मेल्टर्स और पावर प्लांट्स में प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन को नई दिशा दे रही हैं।
माइन रेस्क्यू और भारी मशीनरी: कंपनी की भूमिगत खदानों में महिला इंजीनियर और ऑपरेटर भारी माइनिंग मशीनरी चलाने से लेकर विशेष माइन रेस्क्यू टीमों का हिस्सा बनकर रूढ़िवादिता को तोड़ रही हैं।
हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमरेंदु प्रकाश ने कहा: “स्वतंत्रता ने हमें एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की ताकत दी, जबकि आर्थिक स्वतंत्रता हर व्यक्ति को अपने जीवन को संवारने का सामर्थ्य देती है। चाहे ग्रामीण क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करने वाली महिला हो या अत्याधुनिक तकनीकी संयंत्रों का नेतृत्व करने वाली युवा इंजीनियर, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को नेतृत्व, आजीविका और आकांक्षाओं के नए अवसर उपलब्ध कराकर ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
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