
उदयपुर। विश्व विरासत दिवस 2025 पर हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने न सिर्फ एक संदेश दिया, बल्कि एक मिशन की शुरुआत की—“विरासत को बचाने के लिए जंग से लड़ो।” दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी के रूप में हिन्दुस्तान जिंक अब विरासत संरक्षण की एक अनदेखी लड़ाई का नेतृत्व कर रही है—एक ऐसी लड़ाई जो पत्थरों की नहीं, बल्कि धातुओं की है।
जब हम धरोहर स्थलों की बात करते हैं तो ताजमहल और चारमीनार जैसे चमकते हुए पत्थर हमारे ज़ेहन में आते हैं, लेकिन इनके साथ मौजूद लौह-इस्पात की संरचनाएं अक्सर हमारी नज़र से ओझल रहती हैं। यही वो जगह है, जहाँ जिंक गैल्वनाइजेशन एक नायक की भूमिका निभाता है। यह तकनीक धातुओं को जंग से बचाकर न केवल संरचनाओं की उम्र बढ़ाती है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती है।
जंग – एक अदृश्य दुश्मन
हवा में नमी, प्रदूषण और लवणों से होने वाली प्रतिक्रियाएं सालों की मेहनत को धीरे-धीरे निगल जाती हैं। हिन्दुस्तान जिंक ने इस खतरनाक सच्चाई पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत को हर साल अपने GDP का लगभग 5% हिस्सा जंग से होने वाले नुकसान में गंवाना पड़ता है—जो जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में कहीं अधिक है।
जिंक: एक रक्षक, एक समाधान
लोटस टेंपल, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, प्रधानमंत्री संग्रहालय, यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, नौसेना भवन, कतर का लुसैल स्टेडियम और दुबई के बुर्ज खलीफा जैसे प्रतिष्ठित निर्माणों ने जिंक गैल्वनाइजेशन को अपनाकर यह दिखा दिया है कि भविष्य की विरासत को कैसे बचाया जा सकता है। यह तकनीक न केवल धातुओं को 30 से 40 वर्षों तक की सुरक्षा देती है, बल्कि इसकी लागत भी पारंपरिक समाधानों की तुलना में कम है।
जिम्मेदारी हम सबकी
आज जब भारत वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, तो ऐसे में धरोहरों की रक्षा एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाती है। हिन्दुस्तान जिंक का यह प्रयास हमें यह याद दिलाता है कि आधुनिकता की दौड़ में भी विरासत की रक्षा को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
थीम से मेल खाता संदेश
इस साल विश्व विरासत दिवस की थीम है—“आपदाओं और संघर्षों से खतरे में पड़ी धरोहर।” ऐसे में हिन्दुस्तान जिंक का यह अभियान न केवल समयानुकूल है, बल्कि यह राष्ट्र को उसकी जड़ों से जोड़े रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम भी है।
जिंक कोई आम धातु नहीं—यह हमारे अतीत की रक्षा का कवच है, वर्तमान की सुरक्षा की ढाल है और भविष्य की नींव का आधार है। हिन्दुस्तान जिंक का यह मिशन सिर्फ धातुओं को बचाने का नहीं, भारत की आत्मा को सहेजने का संकल्प है।
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