
मुंबई। एनसीपी के अजित पवार गुट के नेता और महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की शनिवार को बांद्रा के खेर वाड़ी सिग्नल के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। सिद्दीकी पर उनके बेटे के दफ्तर के बाहर 2 से 3 गोलियां चलाई गईं। उन्हें तुरंत लीलावती अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है, हालांकि हमलावरों की पहचान और हत्या के मकसद के बारे में अभी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है, और अपराध की वजह पर अटकलें जारी हैं।
कांग्रेस से नाता तोड़कर NCP में शामिल हुए थे सिद्दीकी

बाबा सिद्दीकी ने इसी साल 8 फरवरी को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर 10 फरवरी को अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में प्रवेश किया था। मुंबई में डिप्टी सीएम अजित पवार और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल समेत कई नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी।
कांग्रेस पर तीखे हमले
एनसीपी में शामिल होने के बाद बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि “कांग्रेस ने मुझे करी पत्ते की तरह इस्तेमाल किया, जिसका काम सिर्फ स्वाद बढ़ाना होता है। जब आपकी बात नहीं सुनी जाती, तो आप किनारा कर लेते हैं।”
उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने 48 साल के लंबे रिश्ते पर खेद जताते हुए कहा था कि “मैं मोटी चमड़ी का नहीं हूं। इसलिए कांग्रेस छोड़ते वक्त मुझे दुख हुआ, लेकिन कांग्रेस को सिर्फ वोट चाहिए, उन्हें कुछ देना नहीं है।”
राजनीतिक भूचाल और तनाव
बाबा सिद्दीकी की हत्या ने महाराष्ट्र की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा दी है। उनकी हत्या के पीछे के कारणों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। एनसीपी और कांग्रेस के बीच पहले से ही खिंची तलवारें अब और तीखी हो सकती हैं, जबकि इस घटना ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
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