
उदयपुर/देबारी। हिंदुस्तान जिंक के जिंक स्मेल्टर देबारी में आयोजित ‘सखी उत्सव’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और मंच मिलता है, तो वे बदलाव की सबसे बड़ी वाहक बनती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में देबारी स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में उदयपुर, राजसमंद और आसपास के क्षेत्रों की लगभग 1800 से अधिक महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
सखियां हैं हिम्मत की मिसाल : चेतना भाटी
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और उदयपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) चेतना भाटी ने सखी महिलाओं के आत्मविश्वास को देख उन्हें ‘हिम्मत की मिसाल’ बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा-आज की महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं। हिंदुस्तान जिंक की ‘सखी’ परियोजना ने महिलाओं को उनके छिपे हुए हुनर और ताकत से रूबरू कराया है। अब महिलाएं परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, जिससे उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य मिल रहा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाएं अब सिर्फ समाज का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज का नेतृत्व करने वाली ताकत बन चुकी हैं।
माइनिंग जैसे कठिन क्षेत्र में भी महिलाओं का परचम
हिंदुस्तान जिंक (वेदांता ग्रुप) के एसबीयू डायरेक्टर विवेक यादव ने कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि ‘सखी’ परियोजना के माध्यम से न केवल ग्रामीण विकास हो रहा है, बल्कि वेदांता ग्रुप में महिलाएं अब माइनिंग ऑपरेशन्स को भी सफलतापूर्वक संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि “सखी, समाधान और जिंक कौशल” जैसी पहलों का उद्देश्य एक ऐसा समावेशी भविष्य बनाना है जहाँ हर महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो।
खेल, संस्कृति और सामाजिक संदेश का अनूठा संगम
बढ़ते तापमान और कड़ी धूप के बावजूद उत्सव के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार रहीं- महिलाओं ने कबड्डी, रस्सा-कस्सी, म्यूजिकल चेयर और बैलेंिसंग जैसी प्रतियोगिताओं में अपनी शारीरिक दक्षता का परिचय दिया। विजेताओं को मंच पर सम्मानित भी किया गया।
जागरूकता नाटक : ‘उठोरी’ कार्यक्रम के तहत सखियों ने बाल विवाह और महिला शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर मर्मस्पर्शी नाटकों का मंचन किया, जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
सांस्कृतिक छटा : राजस्थानी लोक गीतों और भजनों पर महिलाओं का सामूहिक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया।
दाइची और उपाया ब्रांड के माध्यम से आर्थिक क्रांति : सखी उत्सव के दौरान स्टॉल्स के माध्यम से उन उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया जो इन ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे हैं।
दाइची (खाद्य उत्पाद) और उपाया (परिधान) जैसे ब्रांड्स अब केवल गांवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
हिंदुस्तान जिंक द्वारा राजस्थान के 5 जिलों (उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर, चित्तौड़गढ़) और उत्तराखंड के पंतनगर में इस कार्यक्रम के जरिए 25,000 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया जा चुका है।
कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति : इस अवसर पर वेदांता की हेड सीएसआर अनुपम निधि, यूनिट एचआर हेड अनिल गादिया, सीएसआर हेड रुचिका नरेश चावला, मंागी लाल अहीर, प्रकाश श्रीमाली और एग्जीक्यूटिव लेडीज क्लब की कई सदस्य उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन विजयी प्रतिभागियों के पुरस्कार वितरण और उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के साथ हुआ।
मुख्य आंकड़े जो खबर को दमदार बनाते हैं।
21,607 स्वयं सहायता समूह (SHG) सक्रिय।
184 गांवों तक पहुंच।
14 उत्पादन इकाइयाँ और 208 स्टोर्स स्थापित।
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