
मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के सोमवार को 89 वर्ष की आयु में निधन के बाद पूरे फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर फैल गई है। कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, लेकिन उनकी सबसे भावुक विदाई संदेश अभिनेत्री सायरा बानो की ओर से आया, जिन्होंने लंबे नोट में धर्मेंद्र और उनके दिवंगत पति दिलीप कुमार के बीच दशकों पुराने रिश्ते को याद किया।
पुरानी तस्वीरों के साथ लिखा भावुक नोट
सायरा बानो ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर धर्मेंद्र, दिलीप कुमार और खुद की कई दुर्लभ पुरानी तस्वीरें साझा कीं। इसके साथ उन्होंने एक लंबा पोस्ट लिखते हुए बताया कि धर्मेंद्र सिर्फ उनके सह-अभिनेता ही नहीं, बल्कि दिलीप कुमार के “धरम” थे — एक छोटे भाई की तरह।
उन्होंने लिखा कि धर्मेंद्र के निधन से “कॉमन सिनेमाई और पर्सनल इतिहास का एक चैप्टर बंद होता सा महसूस हो रहा है।”
1952 का किस्सा — जब युवा धर्मेंद्र दिलीप कुमार के घर में घुस गए थे।

सायरा बानो ने वह मशहूर किस्सा भी फिर से सुनाया, जिसे धर्मेंद्र जीवन भर शर्माते हुए दोहराते थे। 1952 में लुधियाना का एक युवा लड़का — धर्मेंद्र — फिल्म ‘शहीद’ देखकर दिलीप कुमार के दीवाने हो गए थे। इसी जुनून में वह बिना अपॉइंटमेंट के बांद्रा के पाली हिल स्थित दिलीप कुमार के घर जा पहुँचे।
घर के अंदर जाकर उन्होंने दिलीप कुमार को सोफ़े पर सोते हुए देखा। दोपहर की धूप उनके चेहरे पर पड़ रही थी। सायरा बानो ने लिखा:
“धरम हैरानी से वहीं खड़े रह गए जब तक यूसुफ साहब जाग नहीं गए। घबराकर वह हिरण की तरह तेज़ी से घर से भाग गए। यह उनकी पसंदीदा यादों में से एक बन गई।”
छह साल बाद किस्मत ने मिलाया—और रिश्ते की नींव पड़ी
1958 में फ़िल्मफ़ेयर टैलेंट हंट के दौरान दोनों फिर मिले, जहाँ दिलीप कुमार की बहन फ़रीदा ने मुलाकात करवाई। यहीं से रिश्ते का वह धागा बुना गया, जिसकी warmth जीवन भर कायम रही।
सायरा बानो बताती हैं कि दिलीप कुमार ने उसी दिन प्यार से अपना स्वेटर उतारकर युवा धर्मेंद्र के कंधों पर रख दिया। यही छोटा-सा इशारा आजीवन भाईचारे की शुरुआत बना।
“धरम घर के ही आदमी थे” — सायरा बानो
सायरा बानो ने बताया कि धर्मेंद्र उनके घर में किसी भी समय आ जाते थे, चाहे आधी रात हो या सुबह। घर के सभी लोग उन्हें अपने सदस्य की तरह प्यार देते थे। Stardom की चमक जब भारी पड़ती, तो वह दिलीप कुमार के पास सलाह लेने आते।
“यूसुफ साहब उन्हें रास्ता दिखाते, संभालते, और उनकी मूल्यों की याद दिलाते।”
‘बेताब’ के समय वाली रात — जब धर्मेंद्र बेटे की फिल्म पर सलाह लेने आए
एक और याद साझा करते हुए सायरा बानो ने लिखा कि धर्मेंद्र एक रात देर से सनी देओल की डेब्यू फिल्म बेताब की तस्वीरें लेकर आए। वह बेहद बेचैन थे और अमृता सिंह के चयन पर दिलीप कुमार की राय चाहते थे।

दिलीप कुमार ने ध्यान से उनकी बातें सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया। धर्मेंद्र घर से संतुष्ट होकर लौटे।
दिलीप कुमार के लिए प्रेम—जो कभी कम न हुआ
सायरा बानो ने बताया कि धर्मेंद्र के घर में माता-पिता और बेटों की तस्वीरों के साथ दिलीप कुमार की तस्वीर भी हमेशा लगी रहती थी। वह अक्सर मज़ाक में कहते:
“सायरा, मैं ओह यूसुफ़ साहब के प्यार में आपका मुकाबला करता हूँ!”
सायरा बानो ने लिखा कि मज़ाक के पीछे एक गहरा स्नेह छिपा था, जिसे कोई नहीं बदल सकता था।
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