आप पढ़ रहे हैं हबीब की रिपोर्ट

जयपुर। राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शनिवार सुबह परिवहन विभाग के निरीक्षक सुजानाराम चौधरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के चार जिलों – माउंट आबू, भीनमाल, सिरोही और जोधपुर – में स्थित सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी अपने सीमित सेवाकाल में ही करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर सकता है?
कार्रवाई के पीछे का आधार
यह कार्रवाई ACB को मिली एक गोपनीय शिकायत के बाद हुई, जिसमें सुजानाराम चौधरी पर वाहन पंजीकरण, लाइसेंस जारी करने और गुजरात सीमा पर अवैध वसूली जैसे कार्यों के बदले नियमित रूप से रिश्वत लेने का आरोप था। जांच के दौरान चौधरी के नाम और उनके परिजनों के नाम पर बड़ी संख्या में अचल संपत्तियाँ, लग्ज़री मकान, फार्महाउस और भारी निवेश की जानकारी सामने आई।
छापेमारी में क्या मिला?
अब तक की कार्रवाई में चौधरी के पास:
• माउंट आबू और जोधपुर में करोड़ों की कोठियाँ
• 8000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में बनी आलीशान कोठी, जिसमें 21 ब्रांडेड एसी, महंगे टीवी, फर्नीचर और इंटीरियर मौजूद हैं
• जोधपुर की पॉश कॉलोनी ‘आशापूर्णा सिटी’ में मकान
• भीनमाल, सिरोही और जालोर में कई भूखंड व अन्य संपत्तियाँ
• तकनीकी मूल्यांकन जारी, प्रारंभिक आकलन में 2.5 करोड़ से अधिक की अवैध परिसंपत्तियाँ
इसके अतिरिक्त माउंट आबू में हाल ही में खरीदी गई कोठी में अवैध निर्माण भी पाया गया, जिस पर नगर पालिका द्वारा कार्रवाई कर निर्माण सामग्री ज़ब्त की गई।
ACB की इस छापेमारी ने यह उजागर किया है कि कैसे जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारी, जिनकी नियुक्ति आम तौर पर सेवा प्रदान करने के लिए होती है, भ्रष्ट तंत्र में सक्रिय होकर जनहित के कार्यों को निजी धन-संग्रह में बदल देते हैं।
यह मामला दर्शाता है कि:
• रिश्वत के छोटे-छोटे लेन-देन वर्षों में एक बड़े भ्रष्टाचार में बदल सकते हैं।
• वैध वेतन के मुकाबले जब आय का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है, तब यह केवल व्यक्तिगत लालच नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक को भी दर्शाता है।
•
इस घटना ने प्रशासनिक निगरानी तंत्र की कमजोरी को भी उजागर किया है। यदि इतने वर्षों से यह गतिविधियाँ चल रही थीं, तो संबंधित विभाग, वरिष्ठ अधिकारी और लेखा निरीक्षण प्रणाली इस पर पहले क्यों सक्रिय नहीं हुई?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते सतर्कता बरती जाती, तो इतना बड़ा आर्थिक अपराध रोका जा सकता था।
अब जबकि ACB ने जांच प्रारंभ कर दी है और छापेमारी से कई अहम दस्तावेज़ व सबूत एकत्रित किए हैं, अगला कदम संपत्तियों की तकनीकी वैल्यूएशन, बैंक खातों की जांच, परिजनों के नाम पर संपत्ति विवरण, और मनी ट्रेल की गहन छानबीन होगी।
यह भी देखा जाएगा कि क्या इस भ्रष्टाचार के तार विभाग के अन्य अधिकारियों या बाहरी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
परिवहन निरीक्षक पर की गई यह कार्रवाई न केवल एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार की कहानी है, बल्कि यह राजस्थान में सार्वजनिक सेवा व्यवस्था की साख पर भी सवालिया निशान लगाती है। ACB की यह सक्रियता सराहनीय है, लेकिन जब तक ऐसी घटनाओं के पीछे छिपे पूरे तंत्र को चिन्हित कर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह लड़ाई अधूरी ही रहेगी।
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