
बीकानेर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राजस्थान के बीकानेर में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के जिलों की सुरक्षा व्यवस्था, सीमा प्रबंधन और सीमा पार से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सीमावर्ती जिलों— बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर एवं फलोदी के जिला कलेक्टर (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हुए।
बैठक में यह बड़ा निर्णय लिया गया कि देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए प्रत्येक सीमावर्ती जिले में 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क (सुरक्षा ढांचा) तैयार किया जाएगा। इस एकीकृत योजना के तहत स्थानीय नागरिकों, राज्य सरकार के प्रशासनिक तंत्र और देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जाएगा, जिससे सीमा सुरक्षा को पूरी तरह व्यापक और फुलप्रूफ बनाया जा सके।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा के लिहाज से अवैध निर्माणों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहशीलता) की नीति अपनाने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि:
अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में जितने भी अवैध निर्माण हुए हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर जमींदोज (ध्वस्त) किया जाए।
घुसपैठ, नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की तस्करी, अतिक्रमण, टेरर फंडिंग और अन्य सीमा-पार अपराधों को रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF), आयकर विभाग (CBDT), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और राजस्थान पुलिस मिलकर एक संयुक्त रणनीति पर काम करें।
गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों के कलेक्टर्स को सुरक्षा और वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सीधी जिम्मेदारी सौंपते हुए निर्देश दिए:
सभी बैंकों में पूर्ण कानूनी और वित्तीय नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
क्षेत्र के प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भौतिक सत्यापन करें और उनके फंडिंग सोर्स (कमाई के स्रोत) की जांच करें।
म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts) और शेल कंपनियों को ट्रैक कर उन्हें बंद करें।
फर्जी सरकारी पहचान पत्रों की बारीकी से पहचान करें ताकि कोई संदिग्ध नागरिकता का लाभ न उठा सके।
अमित शाह ने क्षेत्र में साइबर अपराधों के त्वरित समाधान के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन ‘1930’ कॉल सेंटर का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की हिदायत दी। इसके साथ ही, उन्होंने कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रियाओं को और अधिक आधुनिक व मजबूत बनाने के लिए देश के तीन नए आपराधिक कानूनों को जमीनी स्तर पर पूर्ण रूप से लागू करने के निर्देश दिए।
सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकने और वहां बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया गया। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए इन गांवों में केंद्र व राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का 100% सैचुरेशन (पूर्ण लाभ) सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि अंतिम छोर पर बैठे नागरिक को देश के विकास का सीधा हिस्सा बनाया जा सके।
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