
भू-रूपान्तरण के मांगी गई लाखों की रिश्वत, आरोपियों से पूछताछ एवं ठिकानों की तलाशी जारी
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जयपुर विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। घूसखोरों का भंडाफोड़ करते हुए सात लोगों को रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया। इनमें एक तहसीलदार, 3 गिरदावर, एक जेईएन, पटवारी और दलाल शामिल हैं।
एसीबी की गिरफ्त में आने वालों में जयपुर विकास प्राधिकरण के लक्ष्मीकांत गुप्ता तहसीलदार, श्रीमती रूकमणि गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक), रविकांत शर्मा गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक), विमला मीणा गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक), खेमराज मीणा कनिष्ठ अभियंता, श्रीराम पटवारी जेडीए जाेन-9, जयपुर एवं दलाल महेशचंद मीणा (प्राईवेट व्यक्ति) शामिल है।
भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूराे के महानिदेशक श्री डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि जयपुर नगर तृतीय इकाई काे परिवादी द्वारा शिकायत दी गई कि उसकी जमीन
के रूपान्तरण अन्तर्गत 90-ए करवाने की एवज में जयपुर विकास प्राधिकरण जाेन-9 के लक्ष्मीकांत गुप्ता तहसीलदार द्वारा 1 लाख रुपए, श्रीमती रुक्मणी गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक) द्वारा 1 लाख रुपए, रविकांत शर्मा गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक), खेमराज मीणा कनिष्ठ अभियंता द्वारा 40 हजार रुपए, श्रीराम शर्मा पटवारी द्वारा 20 हजार रुपए, विमला मीणा गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक) एवं उसके पति दलाल महेशचंद मीणा (प्राईवेट व्यक्ति) के माध्यम से कुल 13 लाख रुपए रिश्वत राशि की मांग कर परेशान किया जा रहा है।
इस पर एसीबी जयपुर के उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रवि के सुपरवीजन में एसीबी की जयपुर नगर तृतीय इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री हिमांशु कुलदीप के नेतृत्व में शिकायत का सत्यापन किया गया। इनके साथ टीम ने शुक्रवार को ट्रेप कार्रवाई करते हुए तहसीलदार लक्ष्मीकांत को 50 हजार रुपए, गिरदावर रुक्मणी को 20 हजार रुपए, जेईएन खेमराज मीणा को 40 हजार रुपए, गिरदावर रविकांत को 20 हजार रुपए, पटवारी श्रीराम को 20 हजार रुपए लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस मामले में आरोपी विमला मीणा गिरदावर (भ ू-अभिलेख निरीक्षक) एवं दलाल महेश चंद मीणा (प्राईवेट व्यक्ति) काे भी संलिप्तता के आधार पर मौके पर गिरफ्तार किया गया है।
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्रीमती स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में आराेपियों से पूछताछ तथा अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।। एसीबी द्वारा मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत प्रकरण दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान किया जायेगा।
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