
प्रदेश कार्यसमिति की सूची देखने के लिए यहां क्लिक कीजिए
जयपुर/उदयपुर | राजस्थान भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा ने मेवाड़ की राजनीति में एक स्पष्ट संदेश दिया है। वर्तमान में उदयपुर शहर ‘उदयपुर फाइल्स’ नामक कथित वीडियोकांड की वजह से पूरे प्रदेश में चर्चा और विवादों का केंद्र बना हुआ है। इस कांड में कई स्थानीय रसूखदारों और राजनीतिक जुड़ाव रखने वाले लोगों के नाम सोशल मीडिया पर उछल रहे हैं। इसके बावजूद, भाजपा ने इन विवादों से किनारा करते हुए संभाग के स्वच्छ छवि वाले और अनुभवी दिग्गजों को कार्यसमिति में शामिल कर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। लेकिन खास बात यह है कि बीजेपी के स्थानीय नेताओं को उदयपुर फाइल्स में शामिल नेताओं पर कार्रवाई का इंतजार है।
विवादित नामों से बनाई दूरी
नई कार्यसमिति की सबसे खास बात यह है कि इसमें ‘उदयपुर फाइल्स’ में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चर्चित होने वाले किसी भी व्यक्ति को स्थान नहीं दिया गया है। पार्टी ने उन चेहरों पर भरोसा जताया है जो लंबे समय से संगठन के लिए समर्पित रहे हैं। उदयपुर शहर से पूर्व सांसद अर्जुन मीणा, पूर्व प्रदेश मंत्री प्रमोद सामर और पूर्व जिलाध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली को कार्यसमिति सदस्य बनाकर पार्टी ने साफ किया है कि वह केवल ‘परखे हुए चेहरों’ के साथ ही आगे बढ़ेगी।
मेवाड़-वागड़ को संगठन में बड़ा स्थान

विवादों के साये के बावजूद भाजपा के लिए उदयपुर संभाग सामरिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संभाग के हर जिले को प्रतिनिधित्व दिया गया है:
उदयपुर देहात : पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है।
बांसवाड़ा : यहां से पूर्व जिलाध्यक्ष लाभ चंद पटेल और पूर्व प्रदेश मंत्री धनसिंह रावत को जगह मिली है।
डूंगरपुर : आदिवासी अंचल से अनीता कटारा, प्रभु लाल पंड्या, दीनदयाल सिंह चौहान और सुदर्शन जैन जैसे 4 प्रमुख चेहरों को शामिल किया गया है।
प्रतापगढ़ : यहाँ से पूर्व प्रदेश मंत्री पिंकेश पोरवाल को सदस्य मनोनीत किया गया है।
स्थायी आमंत्रित सदस्यों में भी संभाग का मान
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (स्थायी आमंत्रित सदस्य) में भी मेवाड़ का प्रभाव बरकरार है। चित्तौड़गढ़ से सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सी.पी. जोशी को इस महत्वपूर्ण सूची में शामिल किया गया है, जो यह दर्शाता है कि संभाग का राजनीतिक महत्व कम नहीं हुआ है।
राजनीतिक निहितार्थ : विवाद बनाम विश्वास
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘उदयपुर फाइल्स’ वीडियोकांड की वजह से शहर की राजनीति में जो अस्थिरता और अविश्वास का माहौल बना था, उसे भाजपा ने इस संतुलित सूची से पाटने की कोशिश की है। विवादित नामों को पूरी तरह बाहर रखकर पार्टी ने जनता और कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया है कि संगठन की मर्यादा और निष्ठा ही सर्वोपरि है। संभाग के पुराने जिलाध्यक्षों और पूर्व विधायकों को प्राथमिकता देना यह बताता है कि आगामी चुनौतियों के लिए भाजपा प्रयोग करने के बजाय अपने विश्वसनीय ‘पुराने चावलों’ पर ही भरोसा कर रही है।
About Author
You may also like
पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की 16वीं पुण्यतिथि : उदयपुर में उमड़ा जनसैलाब, ‘अंत्योदय’ के प्रणेता को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
महंगाई का बड़ा झटका: पेट्रोल-डीजल 3 रुपए और CNG 2 रुपए महंगी, 2 साल बाद बढ़ी कीमतें
महाशक्तियों की महामुलाकात : बीजिंग के रेड कार्पेट से तय होगी वैश्विक राजनीति और नई टेक-इकॉनमी की दिशा
राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में महा-फेरबदल : 187 RAS अधिकारियों के तबादले, देखें पूरी सूची और नवीन पदस्थापन
असम में हिमंता के मंच पर जब ‘कटारिया’ से मिले मोदी… असम की रील से दहल उठी उदयपुर की सियासत
