लेंस की ज़ुबान : फ़्रेम में दर्ज मुस्कुराहटें, आंखों के सन्नाटे और कल-आज का फ़र्क़
एक फ़ोटो जर्नलिस्ट के लिए कैमरा महज़ तसवीरें खींचने का पुर्ज़ा नहीं होता, वह सियासत
एक फ़ोटो जर्नलिस्ट के लिए कैमरा महज़ तसवीरें खींचने का पुर्ज़ा नहीं होता, वह सियासत
फोटो : कमल कुमावत उदयपुर। सिनेमा के सुनहरे दौर में जब निर्देशक महबूब ख़ान या