गुलाब बाग : शहर की धड़कनों में महकती यादें, उम्र की शाम और एक वादा, मेयर-डिप्टी मेयर व पार्षदों का सम्मान

 

सैयद हबीब/कमल कुमावत, उदयपुर

सिनेमा के किसी पुराने, सजल फ्रेम की तरह जिंदगी जब बहुत तेजी से भागती है, तो इंसान ठहरने के लिए किसी दरख्त का साया तलाशता है। उदयपुर जैसे तिलिस्मी शहर के सीने पर गुलाब बाग महज़ पत्तों, क्यारियों और पगडंडियों का जोड़ नहीं है; यह इस शहर की रूह है, उसका फेफड़ा है और सांसों का ऐसा मुकद्दस ठिकाना है जहां तीन पीढ़ियां एक साथ टहलती नजर आती हैं।

कभी जिस धूल-मिट्टी वाली पगडंडी पर नन्हे कदमों ने लड़खड़ाते हुए चलना सीखा था, आज उसी पगडंडी पर वही कदम लाठी के सहारे अपनी उम्र की ढलती शाम को सुकून से जी रहे हैं। बचपन में टॉय ट्रेन की सीटी पर तालियां बजाने वाले बच्चे कब खुद सफेद बालों वाले बुजुर्ग बन गए और कब वे धूप सेकने इसी बाग के पत्थरों पर आ बैठे, इसका हिसाब गुलाब बाग के पुराने बरगदों के पास दर्ज है।

भरी दोपहरी और झुलसाती जेठ की गर्मी में भी जब आप इसकी हरी छांव तले दाखिल होते हैं, तो अरावली की गर्म हवाएं अचानक शांत होकर किसी मां के आंचल की तरह शीतल स्पर्श देने लगती हैं। यह उदयपुर का वह ऑक्सीजन हब है, जिसने न जाने कितने थके हुए मनों को दोबारा जीने की नई सांस बख्शी है।

गुलाब बाग मित्र मंडल द्वारा कमल तलाई स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में जब नवनिर्वाचित महापौर पारस सिंघवी और उपमहापौर दिनेश भट्ट का नागरिक अभिनंदन हुआ, तो वह सिर्फ एक रस्मी आयोजन नहीं था। वह दरअसल शहर की उस साझी आस्था और उम्मीद का आईना था जो इस बाग से जुड़ी है। इस भावुक और आत्मीय अवसर पर मित्र मंडल के संरक्षक ओम प्रकाश खोखावत, उपाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद एडवोकेट दिनेश गुप्ता, अशोक गुप्ता, समाजसेवी विमल अग्रवाल, धर्णीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, पूर्व उपमहापौर लोकेश द्विवेदी, प्रकाश अग्रवाल, अनुराग शर्मा, वीरेंद्र खींची, पूर्व पार्षद राजेश जैन, प्रियंका सिंह, मुजुब सिद्दीकी, जगदीश शर्मा, गोपाल बाबेल, हरीश कुमावत, दामोदर माली, कीर्ति प्रकाश व्यास, हरिवल्लभ दवे तथा पुजारी नरेंद्र वैरागी सहित मंडल के कई प्रबुद्ध नागरिकों और सदस्यों ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का साफा व माला पहनाकर आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया।

गुलाब बाग से इस शहर के हर बाशिंदे का नाता राजनीतिक नहीं, विशुद्ध जज्बाती है। यहां नियमित टहलने वालों में से चुनकर आए पार्षद वैभव भंडारी, राजेंद्र परिहार, मनोज साहू, सुमित्रा नागदा और रोहित मेघवाल जब मंच पर सम्मानित हो रहे थे, तो वे उस मिट्टी का कर्ज उतारने का मौन वादा भी कर रहे थे जिसकी छांव में वे बड़े हुए हैं।

इस बाग का इतिहास उन समर्पित हाथों से भी सजा है जिन्होंने इसके हर कोने को संवारने में अपनी निष्ठा उड़ेल दी। आलोक संस्थान के संस्थापक श्यामजी कुमावत ने भी गुलाबबाग को बचाने में अहम भूमिका निभाई और कई काम करवाए। पूर्व पार्षद अनिल सिंघल का योगदान इस बाग की मिट्टी में रचा-बसा है, जिन्होंने उस दौर के शहर विधायक व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और तत्कालीन सभापति रवींद्र श्रीमाली के सहयोग से मिराज वाटिका, अहिंसा वाटिका और नारायण सेवा संस्थान द्वारा रखरखाव वाले क्षेत्रों को विकसित कर बाग को नया जीवन दिया था। वहीं पिछले कई वर्षों से पूर्व पार्षद एवं एडवोकेट दिनेश गुप्ता ने गुलाब बाग के हर पहलू को बहुत करीब से जिया है; जहाँ कहीं कोई कमी नजर आई, उसी समय जिम्मेदारों और अधिकारियों के दरवाजे खटखटाकर उसे दुरुस्त कराने में वे हमेशा सजग प्रहरी बनकर खड़े रहे।

महाराणा सज्जन सिंह ने जब कभी इस बाग का ख्वाब देखा था, तो उसमें सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि एक शहर की नफासत रची-बसी थी। आज जब महापौर पारस सिंघवी यह कहते हैं कि गुलाब बाग सिर्फ एक बाग नहीं बल्कि उदयपुर का दरबार है और इसे वही हेरिटेज स्वरूप तथा हजारों देशी-विदेशी किस्मों के गुलाब वापस दिए जाएंगे, तो सीने में एक पुरानी खुशबू फिर से करवट लेने लगती है। उपमहापौर दिनेश भट्ट जब बच्चों के लिए नए पार्क और परिवारों के बैठने के सुगम ठिकानों का संकल्प दोहराते हैं, तो लगता है कि आने वाली नस्लों का बचपन महफूज रखने की कोई संवेदनशील कोशिश हो रही है।

शहर कंक्रीट के जंगलों में बदल रहे हैं, आबोहवा जहरीली हो रही है, ऐसे वक्त में गुलाब बाग जैसी धरोहरें ही हमें इंसान बनाए रखती हैं। वादों की धूप में अक्सर फूल मुरझा जाया करते हैं, लेकिन शहर की दुआ यही है कि इस बार गुलाब बाग की पगडंडियों पर किए गए ये वादे सचमुच खिलें; ताकि महाराणा सज्जन सिंह के सपनों का वह गुलाब फिर महके और आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांझ और सुबह इसी छांव में बिना किसी खौफ के गुजार सकें।

 

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