फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत की फोटोग्राफी के जरिए देखिए महाकाल की सवारी और विशिष्ट अतिथि

उदयपुर। उदयपुर में सोमवार को महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भक्ति में लीन होकर नृत्य किया। महाकाल की यह वार्षिक सवारी उदयपुर के सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक है, जिसे शहर में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
भव्य सजावट और रथ यात्रा

महाकाल के रथ को विशेष रूप से सजाया गया था। रथ पर भगवान महाकाल की मूर्ति को फूलों और रोशनी से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही। यह सवारी शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए निकाली गई, जहां रास्ते भर श्रद्धालु “हर-हर महादेव” और “महाकाल की जय” के जयकारे लगाते रहे।
रथ के साथ-साथ ढोल-नगाड़ों की आवाज़ें गूंज रही थीं, और श्रद्धालु इस धुन पर नृत्य कर रहे थे। सवारी के मार्ग में कई स्थानों पर भगवान महाकाल की आरती और पूजा का आयोजन किया गया, जहां भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिरों के पुजारियों ने भी विशेष अनुष्ठानों का संचालन किया।
श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति

श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था। सवारी के दौरान भक्तों ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर भजन-कीर्तन किया और महाकाल की महिमा का गुणगान किया। सवारी के दौरान बच्चे, बूढ़े, और युवा सभी वर्गों के लोग शामिल थे, जो इस धार्मिक आयोजन का आनंद ले रहे थे।

विशेषकर, महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर इस सवारी में भाग लिया और महाकाल के रथ के आगे नृत्य किया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन भगवान महाकाल की सवारी में शामिल होकर उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस बड़े आयोजन को देखते हुए, प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। शहर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया, और सवारी के मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई ताकि कोई अव्यवस्था न हो। यातायात व्यवस्था को भी सवारी के समय नियंत्रित किया गया, जिससे भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
आपातकालीन सेवाओं की भी तैनाती की गई थी, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध हो सके।
स्थानीय संस्कृति का प्रतीक

महाकाल की यह सवारी उदयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जो यहां की पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं को जीवित रखती है। इस वार्षिक आयोजन में हर साल हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, जो इस पवित्र अवसर पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से आते हैं।

इस तरह, महाकाल की सवारी ने एक बार फिर से उदयपुर की धार्मिक एकता और भक्ति की भावना को प्रकट किया, जहां श्रद्धालुओं ने मिलकर इस महान उत्सव को सफल बनाया।




















About Author
You may also like
-
महाराष्ट्र निकाय चुनाव: बिना मतदान 68 उम्मीदवार निर्विरोध विजयी, बीजेपी के 44 और शिंदे गुट के 22 प्रत्याशी जीते
-
ओसवाल सभा चुनाव में सियासी घमासान : 7 दिन बढ़ी तारीख, एक-दूसरे पर ‘घबराहट’ और ‘धांधली’ के आरोप
-
न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर जोहरान ममदानी ने कुरान पर शपथ लेकर अमेरिका में रचा इतिहास
-
भारत@2026 : सेवा, सुशासन और समृद्धि — भारत की बदलती तस्वीर का प्रतीक
-
उदयपुर संभाग में सियासी टकराव : बाप बनाम बीजेपी की सीधी लड़ाई, कांग्रेस हाशिए पर